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Maviya abdul kalam khan
dua ko khudaaya meri ba-asar kar
dua ko khudaaya meri ba-asar kar | दु'आ को ख़ुदाया मेरी बा-असर कर
- Maviya abdul kalam khan
दु'आ
को
ख़ुदाया
मेरी
बा-असर
कर
मुझे
साजिशों
से
सदा
बा-ख़बर
कर
- Maviya abdul kalam khan
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मेरी
दु'आ
है
और
इक
तरह
से
बद्दुआ
भी
है
ख़ुदा
तुम्हें
तुम्हारे
जैसी
बेटियाँ
अता
करे
Tehzeeb Hafi
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बे-आरज़ू
भी
ख़ुश
हैं
ज़माने
में
बाज़
लोग
याँ
आरज़ू
के
साथ
भी
जीना
हराम
है
Shuja Khawar
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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है
दु'आ
जल्दी
जन्नत
अता
हो
तुझे
तू
मेरे
इश्क़
का
इश्क़
है
ऐ
रक़ीब
Prit
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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कुछ
इस
लिए
भी
तेरी
आरज़ू
नहीं
है
मुझे
मैं
चाहता
हूँ
मेरा
इश्क़
जावेदानी
हो
Vipul Kumar
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दु'आ
में
माँग
लूँ
मैं
उसको
लेकिन
फ़क़त
पाना
मेरा
मक़सद
नहीं
है
Shadab Asghar
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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हुस्न
जब
मेहरबाँ
हो
तो
क्या
कीजिए
इश्क़
के
मग़्फ़िरत
की
दु'आ
कीजिए
Khumar Barabankvi
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हमेशा
इक
दूसरे
के
हक़
में
दु'आ
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
मिलें
या
बिछड़ें
मगर
तुम्हीं
से
वफ़ा
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
Shabeena Adeeb
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जिस
पे
लफ़्ज़ों
का
वार
होता
है
उसका
दिल
बेकरार
होता
है
माँ
का
साया
जहाँ
नहीं
होता
घर
वो
उजड़ा
दयार
होता
है
छीन
कर
हक
किसी
का
यूँँ
जीना
दिल
पे
अपने
तो
बार
होता
है
चोट
लगती
है
जब
भी
अपनों
से
ग़ैरों
पर
ऐतबार
होता
है
हम
जियें
कैसे
यूँँ
उसूलों
पर
हम
से
हरगिज़
न
यार
होता
है
कोई
हम
को
कलाम
बतलाऐ
जाने
कैसे
ये
प्यार
होता
है
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रंजिशों
से
जुदा
रास्ते
हो
गए
और
फिर
दरमियाँ
फ़ासले
हो
गए
हम
जहाँ
से
चले
आ
गए
फिर
वहीं
रक्स-ए
हालात
से
दाएरे
हो
गए
शीरीं
पैराए
में
जब
भी
की
गुफ्तगू
हम
तो
गिरवीदा
बस
आपके
हो
गए
गांव
जलता
रहा
वो
तमाशाई
थे
उनके
शहरों
में
भी
हादसे
हो
गए
अपने
हो
कर
भी
थे
जो
कभी
अजनबी
हाजतों
के
सबब
वास्ते
हो
गए
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दिल
की
बेताबियाँ
बड़ाने
की
क्या
ज़रूरत
थी
सज
के
आने
की
कुछ
हमें
भी
तबीब
बतला
दो
है
दवा
कोई
ग़म
भुलाने
की
वो
न
माने
मनाने
पर
फिर
भी
हम
ने
छोड़ी
न
जिद
मनाने
की
उन
को
जा
कर
हुआ
है
अर्सा
पर
आस
अब
भी
है
उन
के
आने
की
फाखा
कश
हैं
पडोस
में
लेकिन
है
ख़बर
किसको
उस
घराने
की
उन
को
फ़ुर्सत
कहाँ
के
देखे
वो
आके
हालत
को
इस
दिवाने
की
हार
कैसे
'कलाम'
मानें
हम
हम
को
आदत
है
जीत
जाने
की
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चराग़-ए-रौशनी
हो
कर
दर-ए-दिल
तक
न
पहुँचा
हूँ
नज़र
में
हुस्न
की
यारो
अभी
तक
भी
बुझा
सा
हूँ
ख़बर
करना
ज़रा
क़ासिद
हसीं
साँसों
की
धड़कन
को
हवा
दामन
से
गर
दे
वो
महकता
मैं
उजाला
हूँ
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ज़मीं
चाँद
व
सूरज
सितारे
ख़ुदा
के
हसीं
ख़ूब-सूरत
नज़ारे
ख़ुदा
के
खिलाता
है
सब
को
ख़ुदा
ही
तो
देखो
जहाँ
में
सभी
को
सहारे
ख़ुदा
के
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