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Manish Yadav
jab kabhi khwaab aankh men aa.e
jab kabhi khwaab aankh men aa.e | जब कभी ख़्वाब आँख में आए
- Manish Yadav
जब
कभी
ख़्वाब
आँख
में
आए
यूँँ
लगा
मह-जबीं
वही
आया
- Manish Yadav
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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सलीक़ा
तो
नहीं
मालूम
हम
को
दीद
का
लेकिन
झुकाती
है
नज़र
को
जब
नज़र
भर
देखते
हैं
हम
Sandeep dabral 'sendy'
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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तभी
से
ऊब
इक
उठती
है
सीने
में
वो
बिछड़ा
था
इसी
फागुन
महीने
में
डुबोएगा
मुझे
वो
साथ
अपने
ही
किया
है
छेद
उसने
अब
सफ़ीने
में
कटेंगे
किस
तरह
ये
सर्दियों
के
दिन
तु
बिछड़ा
है
मुहब्बत
के
महीने
में
उदासी
साथ
है
आओ
पिएँ
चल
के
जब
ऐसा
है
तो
क्या
है
हर्ज़
पीने
में
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Manish Yadav
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बस
इतना
याद
रखना
इज़्ज़त
हो
तुम
किसी
की
जो
मेरे
साथ
गुज़री
तुम
उसको
भूल
जाना
Manish Yadav
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कुछ
तो
सजा
बता
दो
मिरी
बे-वफ़ाई
की
लेना
है
इंतकाम
मुझे
अपने
आप
से
Manish Yadav
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तुम
जिस्मों
का
प्यार
समझ
बैठे
हमको
तो
रूहों
तक
जाना
था
Manish Yadav
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कि
अब
मैं
मुस्कुराना
चाहता
हूॅं
क़ज़ा
के
पास
जाना
चाहता
हूॅं
मिरे
दामन
को
कोई
थाम
ले
अब
मैं
ज़ख़्मों
को
भुलाना
चाहता
हूॅं
बनाया
घर
गया
मुझ
सेे
न
कोई
मैं
सबका
घर
गिराना
चाहता
हूॅं
कि
तुम
सेे
अब
निभा
सकता
नहीं
मैं
ये
बंधन
तोड़
जाना
चाहता
हूॅं
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Manish Yadav
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