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Manish Yadav
tum jismoon ka pyaar samajh baithe
tum jismoon ka pyaar samajh baithe | तुम जिस्मों का प्यार समझ बैठे
- Manish Yadav
तुम
जिस्मों
का
प्यार
समझ
बैठे
हमको
तो
रूहों
तक
जाना
था
- Manish Yadav
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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हमें
हर
वक़्त
ये
एहसास
दामन-गीर
रहता
है
पड़े
हैं
ढेर
सारे
काम
और
मोहलत
ज़रा
सी
है
Khurshid Talab
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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ये
बात
अभी
सबको
समझ
आई
नहीं
है
दीवाना
है
दीवाना
तमन्नाई
नहीं
है
दिल
मेरा
दुखाकर
ये
मुझे
तेरा
मनाना
मरहम
है
फ़क़त
ज़ख़्म
की
भरपाई
नहीं
है
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Vikram Gaur Vairagi
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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देख
कर
हर
कोई
बेकार
समझ
ले
मुझ
को
अपनी
उल्फ़त
में
गिरफ़्तार
समझ
ले
मुझ
को
बिना
उसके
तिरी
जन्नत
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तू
मिरी
मान
गुनहगार
समझ
ले
मुझ
को
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Faiz Ahmad
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ऐसे
असमंजस
में
मत
डालो
मुझे
तुम
मेरी
जान
ठीक
से
सोचो
समझ
लो
इश्क़
सा
है
इश्क़
है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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ज़रा
जो
पास
आ
बैठे
यहाँ
पर
तभी
से
दिल
लगा
बैठे
यहाँ
पर
गली
की
सम्त
उसकी
आज
जाके
दिलों
के
ज़ख़्म
खा
बैठे
यहाँ
पर
किसी
से
मिल
गया
धोखा
उन्हें
जो
अभी
से
मुँह
बना
बैठे
यहाँ
पर
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Manish Yadav
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ये
दिन
में
चैन
क्यूँ
आता
नहीं
है
नींद
रातों
में
मुझे
लगता
है
शायद
ज़िन्दगी
मुझ
सेे
ख़फ़ा
होगी
Manish Yadav
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तभी
से
ऊब
इक
उठती
है
सीने
में
वो
बिछड़ा
था
इसी
फागुन
महीने
में
डुबोएगा
मुझे
वो
साथ
अपने
ही
किया
है
छेद
उसने
अब
सफ़ीने
में
कटेंगे
किस
तरह
ये
सर्दियों
के
दिन
तु
बिछड़ा
है
मुहब्बत
के
महीने
में
उदासी
साथ
है
आओ
पिएँ
चल
के
जब
ऐसा
है
तो
क्या
है
हर्ज़
पीने
में
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Manish Yadav
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पहली
मर्तबा
मिला
किसी
सफ़र
में
वो
तो
फिर
इक
उसी
सफ़र
ने
अब
सफ़र
में
डाल
रक्खा
है
Manish Yadav
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तू
कहता
छोड़
कर
आता
तिरी
जानिब
तिरा
साया
ही
काफ़ी
था
सफ़र
ख़ातिर
Manish Yadav
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