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Manish Yadav
ye din men chain kyuuñ aata nahin hai neend raaton men
ye din men chain kyuuñ aata nahin hai neend raaton men | ये दिन में चैन क्यूँ आता नहीं है नींद रातों में
- Manish Yadav
ये
दिन
में
चैन
क्यूँ
आता
नहीं
है
नींद
रातों
में
मुझे
लगता
है
शायद
ज़िन्दगी
मुझ
सेे
ख़फ़ा
होगी
- Manish Yadav
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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छोड़कर
तन्हा
मुझे
जन्नत
में
रहने
लग
गए
हो
और
मैंने
ज़िन्दगीं
कर
ली
जहन्नम
शा'इरी
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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विपरीत
क्यूँ
न
हो
चले
जीवन
की
धार
भी
ये
संग
तेरा
नाव
की
पतवार
सा
लगे
Manish Yadav
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कोई
बेहतर
मिला
है
अब
उसे
मुझ
सेे
नहीं
है
हर्ज़
कोई
मुझको
खोने
में
Manish Yadav
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देखा
उसे
जो
बज़्म
में
राहत
नहीं
रही
आँखों
को
मेरी
फिर
कोई
चाहत
नहीं
रही
जानिब
मिरी
जो
रब
की
नज़र
उठ
गई
तो
फिर
आलिम
की
मुझको
कोई
इबाहत
नहीं
रही
जबसे
किया
ख़ुदा
के
हवाले
ख़ुदी
को
है
फिर
तब
से
मेरे
दिल
में
क़बाहत
नहीं
रही
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Manish Yadav
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नगर
ये
नफ़रतों
का
है
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
न
हो
पाया
किसी
का
वो
हमारा
हो
नहीं
सकता
बचाकर
कुछ
जमापूँजी
बुढ़ापे
के
लिए
रखना
ज़माने
में
यहाँ
कोई
सहारा
हो
नहीं
सकता
तु
ऐसे
मोड़
पे
आकर
मिला
है
मुझको
फिर
से
अब
जहाँ
से
मैं
अभी
तेरा
सहारा
हो
नहीं
सकता
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Manish Yadav
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जब
सुने
ही
नहीं
ग़म
मिरे
उसने
भी
फिर
सभी
से
ग़म
अपने
छुपाने
लगे
Manish Yadav
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