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Manish Yadav
tu kahtaa chhod kar aata tiri jaanib
tu kahtaa chhod kar aata tiri jaanib | तू कहता छोड़ कर आता तिरी जानिब
- Manish Yadav
तू
कहता
छोड़
कर
आता
तिरी
जानिब
तिरा
साया
ही
काफ़ी
था
सफ़र
ख़ातिर
- Manish Yadav
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भूल
जोते
हैं
मुसाफ़िर
रस्ता
लोग
कहते
हैं
कहानी
फिर
भी
Ambreen Haseeb Ambar
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सफ़र
के
ब'अद
भी
मुझ
को
सफ़र
में
रहना
है
नज़र
से
गिरना
भी
गोया
ख़बर
में
रहना
है
Aadil Raza Mansoori
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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सहरा
से
हो
के
बाग़
में
आया
हूँ
सैर
को
हाथों
में
फूल
हैं
मेरे
पाँव
में
रेत
है
Tehzeeb Hafi
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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डर
हम
को
भी
लगता
है
रस्ते
के
सन्नाटे
से
लेकिन
एक
सफ़र
पर
ऐ
दिल
अब
जाना
तो
होगा
Javed Akhtar
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ये
दिल
मलूल
भी
कम
है
उदास
भी
कम
है
कई
दिनों
से
कोई
आस
पास
भी
कम
है
हमें
भी
यूँं
ही
गुजरना
पसंद
है
और
फिर
तुम्हारा
शहर
मुसाफ़िर-शनास
भी
कम
है
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Farhat Abbas Shah
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मैं
था
सदियों
के
सफ़र
में
'अहमद'
और
सदियों
का
सफ़र
था
मुझ
में
Ahmad Khayal
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न
हो
क़मीज़
तो
घुटनों
से
पेट
ढक
लेंगे
ये
लोग
कितने
मुनासिब
हैं
इस
सफ़र
के
लिए
Dushyant Kumar
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बस
इतना
याद
रखना
इज़्ज़त
हो
तुम
किसी
की
जो
मेरे
साथ
गुज़री
तुम
उसको
भूल
जाना
Manish Yadav
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कि
अबकी
तुम
करो
मुझ
सेे
मुहब्बत
तुम्हें
मैं
छोड़
जाना
चाहता
हूँ
Manish Yadav
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वो
आई
लहर
बनके
और
आकर
चली
गई
साहिल
किनारे
बैठा
मैं
तकता
ही
रह
गया
Manish Yadav
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मैं
सोच
के
डर
जाता
हूँ
वो
तेरे
मिरे
ख़त
हर
शख़्स
इन्हें
पढ़
जो
सरेआम
रहा
हो
Manish Yadav
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कि
अब
मैं
मुस्कुराना
चाहता
हूॅं
क़ज़ा
के
पास
जाना
चाहता
हूॅं
मिरे
दामन
को
कोई
थाम
ले
अब
मैं
ज़ख़्मों
को
भुलाना
चाहता
हूॅं
बनाया
घर
गया
मुझ
सेे
न
कोई
मैं
सबका
घर
गिराना
चाहता
हूॅं
कि
तुम
सेे
अब
निभा
सकता
नहीं
मैं
ये
बंधन
तोड़
जाना
चाहता
हूॅं
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Manish Yadav
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