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Manish Yadav
ki ab main muskurana chahta hoon
ki ab main muskurana chahta hoon | कि अब मैं मुस्कुराना चाहता हूॅं
- Manish Yadav
कि
अब
मैं
मुस्कुराना
चाहता
हूॅं
क़ज़ा
के
पास
जाना
चाहता
हूॅं
मिरे
दामन
को
कोई
थाम
ले
अब
मैं
ज़ख़्मों
को
भुलाना
चाहता
हूॅं
बनाया
घर
गया
मुझ
सेे
न
कोई
मैं
सबका
घर
गिराना
चाहता
हूॅं
कि
तुम
सेे
अब
निभा
सकता
नहीं
मैं
ये
बंधन
तोड़
जाना
चाहता
हूॅं
- Manish Yadav
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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इश्क़
कहता
है
भटकते
रहिए
और
तुम
कहते
हो
घर
जाना
है
Madan Mohan Danish
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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इन
का
उठना
नहीं
है
हश्र
से
कम
घर
की
दीवार
बाप
का
साया
Unknown
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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गुज़ारी
ज़िंदगी
सारी
इसी
उम्मीद
में
अपनी
बदल
जाएँगे
अपने
दिन
मसीहों
के
सहारे
में
वो
सब
कुछ
छोड़कर
भागा
तिरे
पीछे
चला
आया
कोई
जादू
चलाया
क्या
था
पलकों
के
इशारे
में
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Manish Yadav
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इशारा
कोई
तो
कर
दो
कि
वापस
आ
रहे
हो
तुम
किसी
के
क़दमों
की
आहट
मेरी
जानिब
को
आती
है
Manish Yadav
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वश
में
ही
नहीं
इलाज
कोई
मेरा
कर
सके
अबके
बार
ये
मरज़
मुझे
तो
मौत
की
लगी
Manish Yadav
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इस
तरह
तन्हा
हुआ
उस
सेे
बिछड़कर
शाख़
जैसे
टूटी
हो
कोई
शजर
से
Manish Yadav
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तेरी
बातों
को
सुनकर
के
हमें
ऐसा
लगा
जानी
तिरे
जैसे
ही
हम
भी
तो
कभी
बेबाक
होते
थे
Manish Yadav
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