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Manish Yadav
bas itnaa yaad rakhna izzat ho tum kisi ki
bas itnaa yaad rakhna izzat ho tum kisi ki | बस इतना याद रखना इज़्ज़त हो तुम किसी की
- Manish Yadav
बस
इतना
याद
रखना
इज़्ज़त
हो
तुम
किसी
की
जो
मेरे
साथ
गुज़री
तुम
उसको
भूल
जाना
- Manish Yadav
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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नाज़
क्या
इस
पे
जो
बदला
है
ज़माने
ने
तुम्हें
मर्द
हैं
वो
जो
ज़माने
को
बदल
देते
हैं
Akbar Allahabadi
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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जलता
नहीं
हूँ
आतिश-ए-रुख़सार
देख
कर
करता
हूँ
नाज़
ताक़त-ए-दीदार
देख
कर
Shaikh Sohail
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काबा
किस
मुँह
से
जाओगे
'ग़ालिब'
शर्म
तुम
को
मगर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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यही
सोच
कर
ख़ुद
पे
हम
नाज़
करते
कि
हम
उनकी
पहली
मुहब्बत
रहे
हैं
Harsh saxena
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तुम्हें
लगा
है
कि
मेरे
होते,
तुम्हें
भी
दिल
में
जगह
मिलेगी
बड़ी
ही
इज़्ज़त
से
कह
रहा
हूँ
,चलो
उठो
अब
मेरी
जगह
से
Shadab Asghar
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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मोहब्बत
के
इक़रार
से
शर्म
कब
तक
कभी
सामना
हो
तो
मजबूर
कर
दूँ
Akhtar Shirani
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ख़ता
उसकी
नहीं
मेरे
जो
आँसू
देख
पाया
वो
बताएँ
क्या
तुम्हें
यारो
सितम
तो
बारिशों
का
था
Manish Yadav
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महफ़िल
में
लोग
उठाने
लगे
हैं
सवाल
अब
बेसाख़्ता
ग़ज़ल
में
तिरा
नाम
आ
गया
Manish Yadav
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बदल
कितना
गया
हूँ
देख
अब
पहले
से
यारा
मैं
यक़ीं
तेरी
किसी
भी
बात
पर
अब
तो
नहीं
आता
Manish Yadav
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मुझे
ही
चाहता
है
मुद्दतों
से
वरना
फिर
रक़ीब
तक
के
तिरे
हम
मुकरने
वाले
थे
ये
उसका
घर
है
यहीं
पे
कहीं
पे
यारों
सो
नहीं
तो
शहरस
कब
के
निकलने
वाले
थे
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Manish Yadav
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वश
में
ही
नहीं
इलाज
कोई
मेरा
कर
सके
अबके
बार
ये
मरज़
मुझे
तो
मौत
की
लगी
Manish Yadav
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