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Manish Yadav
kuchh to saja bataa do mirii be-vafaaii ki
kuchh to saja bataa do mirii be-vafaaii ki | कुछ तो सजा बता दो मिरी बे-वफ़ाई की
- Manish Yadav
कुछ
तो
सजा
बता
दो
मिरी
बे-वफ़ाई
की
लेना
है
इंतकाम
मुझे
अपने
आप
से
- Manish Yadav
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सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
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मैं
क़त्ल
तो
हो
गया
तुम्हारी
गली
में
लेकिन
मिरे
लहू
से
तुम्हारी
दीवार
गल
रही
है
Javed Akhtar
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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वो
क़त्ल
कर
के
मुझे
हर
किसी
से
पूछते
हैं
ये
काम
किसने
किया
है,
ये
काम
किस
का
था?
Dagh Dehlvi
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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दामन
पे
कोई
छींट
न
ख़ंजर
पे
कोई
दाग़
तुम
क़त्ल
करो
हो
कि
करामात
करो
हो
Kaleem Aajiz
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इक
अव्वल
दर्जे
का
पाक
इक
माहिर
है
मन
तो
तुझ
में
रमता
है
दिल
काफ़िर
फिर
है
अपनी
सोचो
क़त्ल
तुम्हें
करना
भी
है
बन्दे
का
तो
क्या
है
बन्दा
हाज़िर
है
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Vikram Gaur Vairagi
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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नहीं
देते
कभी
अब
हौसला
कुछ
आगे
बढ़ने
का
ये
दुनिया
वाले
देखो
अब
यहाँ
पर
पर
कतरतें
हैं
Manish Yadav
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बीते
जो
साल
याद
तिरी
आई
थी
मुझे
फिर
बीते
साल
याद
में
डूबा
ही
रह
गया
Manish Yadav
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पहचानता
हूँ
अच्छे
से
नीयतें
मैं
उनकी
वो
बातों
से
भी
अपना
ईमान
बेचते
हैं
Manish Yadav
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नगर
ये
नफ़रतों
का
है
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
न
हो
पाया
किसी
का
वो
हमारा
हो
नहीं
सकता
बचाकर
कुछ
जमापूँजी
बुढ़ापे
के
लिए
रखना
ज़माने
में
यहाँ
कोई
सहारा
हो
नहीं
सकता
तु
ऐसे
मोड़
पे
आकर
मिला
है
मुझको
फिर
से
अब
जहाँ
से
मैं
अभी
तेरा
सहारा
हो
नहीं
सकता
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Manish Yadav
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मोहब्बत
लफ़्ज़
से
वाक़िफ़
यहाँ
सारा
ज़माना
है
मोहब्बत
जब
कभी
होवे
कहाँ
दिल
का
ठिकाना
है
Manish Yadav
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