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Manish Yadav
mohabbat lafz se waqif yahaañ saara zamaana hai
mohabbat lafz se waqif yahaañ saara zamaana hai | मोहब्बत लफ़्ज़ से वाक़िफ़ यहाँ सारा ज़माना है
- Manish Yadav
मोहब्बत
लफ़्ज़
से
वाक़िफ़
यहाँ
सारा
ज़माना
है
मोहब्बत
जब
कभी
होवे
कहाँ
दिल
का
ठिकाना
है
- Manish Yadav
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दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मोहब्बत
का
नहीं
इक
दिन
मुकर्रर
मोहब्बत
उम्रभर
का
सिलसिला
है
Neeraj Naveed
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अगर
बेदाग़
होता
चाँद
तो
अच्छा
नहीं
लगता
मोहब्बत
ख़ूब-सूरत
दाग़
है,
बेदाग़
से
दिल
पर
Umesh Maurya
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लिखी
होगी
मोहब्बत
जिन
सफ़ों
पर
मेरा
दावा
है
वो
नम
ही
मिलेंगे
किसी
दिन
ऊब
जाओगे
सभी
से
तुम्हें
उस
रोज़
फिर
हम
ही
मिलेंगे
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Ritesh Rajwada
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इश्क़
में
ये
दावा
तो
नईं
है
मैं
ही
अव्वल
आऊँगा
लेकिन
इतना
कह
सकता
हूँ
अच्छे
नंबर
लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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प्यार
क्या
है
ये
हमको
नहीं
थी
ख़बर
एक
अंजान
रिश्ता
निभाने
लगे
Manish Yadav
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इशारा
कोई
तो
कर
दो
कि
वापस
आ
रहे
हो
तुम
किसी
के
क़दमों
की
आहट
मेरी
जानिब
को
आती
है
Manish Yadav
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तुम्हें
वा'दा
निभाना
था
अजल
तक
साथ
जाना
था
किनारे
आज
बैठे
हैं
हमें
तो
डूब
जाना
था
तुम्हें
समझाऊॅं
कितना
मैं
कहा
कुछ
भी
न
माना
था
ये
तुमने
क्यूँ
बचाया
है
उसे
मुझको
डुबाना
था
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Manish Yadav
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है
कुछ
तो
बात
उन
में
ख़ामोश
आजकल
हैं
टूटे
हुए
हैं
या
फिर
मदहोश
आजकल
हैं
सर
कट
रहें
हैं
देखो
मज़हब
के
नाम
पर
अब
हैरत
है
लोग
देखो
बेहोश
आजकल
हैं
है
काम
जिनका
सच
में
सच
को
हमें
बताना
डर
से
निज़ाम
के
वो
ख़ामोश
आजकल
हैं
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Manish Yadav
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ज़ेहन
में
है
कितना
दर्द
तुमको
कुछ
दिखाऊॅं
क्या
जौन
हूँ
न
मीर
तुमको
यार
कुछ
सुनाऊॅं
क्या
आज-कल
बहुत
अकेले
रहते
हो
सुना
है
ये
गर
हो
हुक्म
तो
कहो
के
ख़्वाब
में
मैं
आऊॅं
क्या
राह
भटके
हैं
पथिक
गुज़र
के
कूचे
से
तिरे
जो
हैं
ये
रिवायतें
मैं
भी
अब
आजमाऊॅं
क्या
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Manish Yadav
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