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Manish Yadav
hai kuchh to baat un
hai kuchh to baat un | है कुछ तो बात उन
- Manish Yadav
है
कुछ
तो
बात
उन
में
ख़ामोश
आजकल
हैं
टूटे
हुए
हैं
या
फिर
मदहोश
आजकल
हैं
सर
कट
रहें
हैं
देखो
मज़हब
के
नाम
पर
अब
हैरत
है
लोग
देखो
बेहोश
आजकल
हैं
है
काम
जिनका
सच
में
सच
को
हमें
बताना
डर
से
निज़ाम
के
वो
ख़ामोश
आजकल
हैं
- Manish Yadav
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वो
कहते
हैं
मैं
ज़िंदगानी
हूँ
तेरी
ये
सच
है
तो
उन
का
भरोसा
नहीं
है
Aasi Ghazipuri
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बस
एक
मैं
था
जिस
सेे
सच
मुच
में
दिलबरी
की
वरना
हर
आदमी
से
उसने
दो
नंबरी
की
जिस
बात
में
भी
हमने
ख़ुद
को
अकेला
रक्खा
बाग़ात
में
भी
हमने
जोड़ों
की
मुख़बरी
की
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Muzdum Khan
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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तुम
मुझे
उतनी
ही
प्यारी
हो
मेरी
जाँ
जितना
प्यारा
है
कश्मीर
इस
देश
को
Alankrat Srivastava
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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जज़्बातों
को
सहज
लफ्ज़ों
में
पिरोता
हूँ
मैं
लिखता
फ़क़त
वही
हूँ
जो
सच
में
होता
हूँ
मैं
Harsh saxena
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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आदमी
देश
छोड़े
तो
छोड़े
'अली'
दिल
में
बसता
हुआ
घर
नहीं
छोड़ता
एक
मैं
हूँ
कि
नींदें
नहीं
आ
रही
एक
तू
है
कि
बिस्तर
नहीं
छोड़ता
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Ali Zaryoun
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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कुछ
ऐसा
हो
के
तू
मुझे
और
मैं
तुझे
देखूँ
रख
ले
तु
मुझे
पास
इक
आईना
बना
के
Manish Yadav
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मैं
चाहूँ
तुझे
बस
यही
चाहता
हूँ
खु़दास
भी
चाहत
तिरी
चाहता
हूँ
रहे
दिल
मिरा
तेरे
दिल
के
क़रीब
अब
नज़र
की
इनायत
तिरी
चाहता
हूँ
तले
काट
लूँ
मैं
ये
सारी
की
सारी
तिरी
ज़ुल्फ़
के
ज़िन्दगी
चाहता
हूँ
रहे
ख़ुश
हमेशा
जहाँ
देख
ले
तू
लबों
पे
तिरे
मैं
हँसी
चाहता
हूँ
रहे
तेरी
आँखों
का
काजल
सलामत
न
आँसू
हों
इनपे
कभी
चाहता
हूँ
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Manish Yadav
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गए
थे
हम
उनको
बुलाने
वहाँ
पर
न
वो
थे
न
मौसम
सुहाने
वहाँ
पर
उन्हें
बाँहों
में
भरने
की
चाह
में
तब
गुज़ारे
थे
कितने
ज़माने
वहाँ
पर
ख़बर
क्या
परिंदे
फँसे
जाल
में
आ
यूँँ
बिखरे
पड़े
थे
जो
दाने
वहाँ
पर
जो
पूछा
उन्होंने
कि
क्या
काम
है
फिर
लगे
बात
हम
भी
बनाने
वहाँ
पर
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Manish Yadav
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तिरे
होंठों
की
खिलती
हर
हँसी
तक
कर
गुल
अब
सीखेंगे
खिलने
का
हुनर
तुझ
सेे
Manish Yadav
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उदासी
का
सबब
था
और
कुछ
यारो
सबब
सब
तेरा
जाना
ही
समझ
बैठे
Manish Yadav
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