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Manish Yadav
pyaar kya hai ye hamko nahin thii khabar
pyaar kya hai ye hamko nahin thii khabar | प्यार क्या है ये हमको नहीं थी ख़बर
- Manish Yadav
प्यार
क्या
है
ये
हमको
नहीं
थी
ख़बर
एक
अंजान
रिश्ता
निभाने
लगे
- Manish Yadav
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ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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एक
रिश्ता
जिसे
मैं
दे
न
सका
कोई
नाम
एक
रिश्ता
जिसे
ता-उम्र
निभाए
रक्खा
Aks samastipuri
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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ज़रा
जो
पास
आ
बैठे
यहाँ
पर
तभी
से
दिल
लगा
बैठे
यहाँ
पर
गली
की
सम्त
उसकी
आज
जाके
दिलों
के
ज़ख़्म
खा
बैठे
यहाँ
पर
किसी
से
मिल
गया
धोखा
उन्हें
जो
अभी
से
मुँह
बना
बैठे
यहाँ
पर
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Manish Yadav
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मैं
उड़ा
जाता
हूँ
बे-घर
पंछी
सा
जाने
किसके
हिस्से
आना
है
मुझे
Manish Yadav
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थे
जो
यार
पहले
भुलाए
न
तुमने
किए
थे
जो
वादे
निभाए
न
तुमने
पनाहों
में
रक्खा
सभी
को
भी
तुमने
किए
हमपे
ज़ुल्फ़ों
के
साए
न
तुमने
मैं
बैठा
रहा
ख़्वाहिशों
में
तिरी
ही
ग़म
अपने
मुझे
ही
बताए
न
तुमने
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Manish Yadav
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शाम
रात
में
हौले
से
बदल
रही
सो
फिर
टूटने
लगा
वा'दा
चाँद
के
निकलने
का
Manish Yadav
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कि
अब
मैं
मुस्कुराना
चाहता
हूॅं
क़ज़ा
के
पास
जाना
चाहता
हूॅं
मिरे
दामन
को
कोई
थाम
ले
अब
मैं
ज़ख़्मों
को
भुलाना
चाहता
हूॅं
बनाया
घर
गया
मुझ
सेे
न
कोई
मैं
सबका
घर
गिराना
चाहता
हूॅं
कि
तुम
सेे
अब
निभा
सकता
नहीं
मैं
ये
बंधन
तोड़
जाना
चाहता
हूॅं
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Manish Yadav
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