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Rohan Hamirpuriya
shukriya dost teri be-vafaaii ka
shukriya dost teri be-vafaaii ka | शुक्रिया दोस्त तेरी बे-वफ़ाई का
- Rohan Hamirpuriya
शुक्रिया
दोस्त
तेरी
बे-वफ़ाई
का
अब
निखरने
लगी
है
शा'इरी
मेरी
- Rohan Hamirpuriya
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तू
इस
तरह
से
मिरे
साथ
बे-वफ़ाई
कर
कि
तेरे
बाद
मुझे
कोई
बे-वफ़ा
न
लगे
Qaisar-ul-Jafri
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चला
था
ज़िक्र
ज़माने
की
बे-वफ़ाई
का
सो
आ
गया
है
तुम्हारा
ख़याल
वैसे
ही
Ahmad Faraz
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हम
से
क्या
हो
सका
मोहब्बत
में
ख़ैर
तुम
ने
तो
बे-वफ़ाई
की
Firaq Gorakhpuri
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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इक
अजब
हाल
है
कि
अब
उस
को
याद
करना
भी
बे-वफ़ाई
है
Jaun Elia
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बेवफ़ाई
ने
तिरी
मुझको
दिया
है
ये
हुनर
बस
यार
दुनिया
में
कहाँ
हर
भाग्य
में
ये
फ़न
लिखा
है
Harsh saxena
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तुम्हें
हरगिज़
ग़लत
समझे
न
कोई
रुको
मैं
बे-वफ़ाई
कर
रहा
हूँ
Shadab Javed
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चमचमाती
कार
में
उसकी
बिदाई
हो
गई
पर
यक़ीन
आता
नहीं
है
बेवफ़ाई
हो
गई
आख़री
चोटी
से
गिरकर
हम
मरे
हैं
इश्क़
की
हम
समझते
थे
हिमालय
की
चढ़ाई
हो
गई
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Tanoj Dadhich
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अदावतें
थीं
तग़ाफ़ुल
था
रंजिशें
थीं
बहुत
बिछड़ने
वाले
में
सब
कुछ
था
बे-वफ़ाई
न
थी
Naseer Turabi
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मिन्नतें
करता
था
रुक
जाओ
मेरा
कोई
नहीं
मेरे
रोके
से
मगर
कौन
रुका
कोई
नहीं
बेवफ़ाई
को
बड़ा
जुर्म
बताने
वाले
याद
है
तूने
भी
चल
छोड़
हटा
कोई
नहीं
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Khan Janbaz
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शिगाफ़
देख
के
कमरे
की
दीवारों
का
लगता
है
हाल
अच्छा
नहीं
है
दीवानों
का
जलती
शम्अ
तो
घर
होता
है
पतंगे
का
बुझाने
वाले
ने
सोचा
नहीं
परवानों
का
बैठे
हैं
बे-हिस
से
दिल
में
सवाल
लिए
क्या
किया
जा
सकता
है
अब
अरमानों
का
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Rohan Hamirpuriya
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किरदार
मुख़्तसर
था
मैं
उसकी
कहानी
में
कारीगरी
मेरी
भी
फ़साने
में
आ
गई
Rohan Hamirpuriya
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इक़रार
कर
के
हर
दफ़ा
इंकार
करता
है
है
इल्तिजा
मेरी
कि
हुनर
ये
सिखा
मुझे
Rohan Hamirpuriya
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हम
से
कहती
रहती
है
शादी
का
और
'आशिक़
ग़ैरों
को
बताती
है
दफ़्तर
से
वापिस
जल्दी
आता
हूँ
बिन
मेरे
माँ
खाना
न
खाती
है
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Rohan Hamirpuriya
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गिला
ये
कि
अब
महज़
सदमात
बाक़ी
रही
है
यही
अब
तो
सौग़ात
बाक़ी
कई
मर्तबा
बोल
दी
बात
दिल
की
बताने
को
फिर
इक
मगर
बात
बाक़ी
सवेरे
मुलाक़ात
की
राह
देखूँ
बढ़े
बेक़रारी
मगर
रात
बाक़ी
न
मंज़िल
नज़र
में
न
रुकने
की
चाहत
मिरी
जान
लंबा
अभी
साथ
बाक़ी
वफ़ा
का
छिड़ा
ज़िक्र
तो
कह
चले
यूँँ
कि
मसलन
अभी
इश्क़
की
मात
बाक़ी
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Rohan Hamirpuriya
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