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Rohan Hamirpuriya
shigaaf dekh ke kamre kii deewaron ka
shigaaf dekh ke kamre kii deewaron ka | शिगाफ़ देख के कमरे की दीवारों का
- Rohan Hamirpuriya
शिगाफ़
देख
के
कमरे
की
दीवारों
का
लगता
है
हाल
अच्छा
नहीं
है
दीवानों
का
जलती
शम्अ
तो
घर
होता
है
पतंगे
का
बुझाने
वाले
ने
सोचा
नहीं
परवानों
का
बैठे
हैं
बे-हिस
से
दिल
में
सवाल
लिए
क्या
किया
जा
सकता
है
अब
अरमानों
का
- Rohan Hamirpuriya
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ख़ुशनुमा
रहा
समाँ
जब
तलक
क़रीब
थे
हो
गए
ख़िलाफ़
वो
चार
दिन
के
साथ
से
Rohan Hamirpuriya
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चाह
रखता
है
मिरे
से
वो
अगर
तक़रीर
की
बात
देरीना
मोहब्बत
की
उठाया
नईं
करे
Rohan Hamirpuriya
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ग़म
का
हिसाब
क्या
करें
लिख
कर
किताब
क्या
करें
सीरत
से
जानता
है
जो
उस
से
हिजाब
क्या
करें
अनजान
है
वो
जान
कर
बोलो
जनाब
क्या
करें
शीशे
से
अब
नहीं
हया
ख़ुद
से
नक़ाब
क्या
करें
हासिल
हो
जिनको
लब
तेरे
पी
कर
शराब
क्या
करें
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Rohan Hamirpuriya
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दुनिया
ने
तस्लीम
किया
जब
फ़न
अपना
घर
पे
जमघट
रहता
है
मेहमानों
का
Rohan Hamirpuriya
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उन
से
मुझे
वफ़ा
की
दरकार
ही
रही
उन
से
मेरी
हमेशा
तकरार
ही
रही
झगड़ा
हुआ
गिरेबाँ
पकड़ा
दुखाया
दिल
इक
अरसे
से
हमारी
यलगार
ही
रही
हाकिम
के
फ़ैसले
से
नाशाद
हूँ
मगर
गर्दन
पे
मेरी
हावी
तलवार
ही
रही
हम
समझे
थे
है
उल्फ़त
इक
चीज़
काम
की
अपने
लिए
मगर
ये
बेकार
ही
रही
बनता
गया
सियासी
मुद्दा
ये
इश्क़
भी
हावी
हमेशा
उनकी
सरकार
ही
रही
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Rohan Hamirpuriya
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