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Rohan Hamirpuriya
ham se kahti rahtii hai shaa
ham se kahti rahtii hai shaa | हम से कहती रहती है शादी का
- Rohan Hamirpuriya
हम
से
कहती
रहती
है
शादी
का
और
'आशिक़
ग़ैरों
को
बताती
है
दफ़्तर
से
वापिस
जल्दी
आता
हूँ
बिन
मेरे
माँ
खाना
न
खाती
है
- Rohan Hamirpuriya
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तुझ
सेे
जुदा
है
मेरा
तौर-ए-ज़िन्दगी
उम्मीद
पे
हरगिज़
नहीं
ज़िंदा
रखा
Rohan Hamirpuriya
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मुझ
पर
ख़ुदा
एहसान
कर
मेरा
सफ़र
आसान
कर
ठुकरा
चुका
जिस
शय
को
मैं
तू
भी
उसे
क़ुर्बान
कर
लाज़िम
नहीं
है
रोना
यूँँ
अब
हौसला
चट्टान
कर
हैं
आँखों
में
इक
ख़्वाब
जो
कामिल
हो
ये
फ़रमान
कर
मुँह-ज़ोर
लोगों
को
तू
अब
ख़ामोशी
से
हैरान
कर
लिख
ज़ुल्म
को
अब
ज़ुल्म
तू
और
जंग
का
ऐलान
कर
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Rohan Hamirpuriya
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तेरे
बिन
आबाद
है
क़ैद
से
आज़ाद
है
Rohan Hamirpuriya
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करना
चाहा
फ़ना
ज़िंदगी
ने
था
में
रक्खा
मुझे
बेहिसी
ने
दर-ब-दर
फिरता
हूँ
मैं
ये
कह
कर
दी
है
छत
मुझको
आवारगी
ने
सहरा
तक
आ
गया
हूँ
तिरे
साथ
मार
डाला
है
लब-तिश्नगी
ने
हँसना
था
और
छुपाने
थे
आँसू
देखा
हँस
कर
के
बेचारगी
ने
बाप
का
कंधा
और
माँ
का
आँचल
ये
सहूलत
है
दी
ज़िंदगी
ने
बद-हवा
सेी
की
ख़ातिर
थी
पी
और
होश
में
रक्खा
संजीदगी
ने
आते-जाते
दिखा
करता
था
जो
डस
लिया
उसको
अफ़सुर्दगी
ने
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Rohan Hamirpuriya
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तेरे
कहे
में
आ
गया
धोखा
मिला
और
खा
गया
अरसे
से
तेरे
साथ
हूँ
क्यूँँ
मुझ
सेे
तू
घबरा
गया
कुछ
ख़त
पुराने
गिर
पड़े
मैं
दफ़अतन
शर्मा
गया
मैं
पूछता
कुछ
और
था
वो
बात
और
करता
गया
सच
बोलने
के
वास्ते
मैं
भीड़
से
कटता
गया
सब
ख़त्म
होना
था
जहाँ
मैं
क्यूँँ
वहीं
तक
आ
गया
जो
मुझ
से
बच
के
चलता
था
इक
रोज़
ख़ुद
टकरा
गया
जो
लौट
कर
आया
नहीं
वो
ख़्वाब
बन
कर
आ
गया
तन्हा
तू
है
तन्हा
मैं
हूँ
हो
कर
जुदा
क्या
पा
गया
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Rohan Hamirpuriya
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