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Aashish kargeti 'Kash'
khaamkhaan bewajah aur kya bolna
khaamkhaan bewajah aur kya bolna | ख़ामख़ाँ बेवजह और क्या बोलना
- Aashish kargeti 'Kash'
ख़ामख़ाँ
बेवजह
और
क्या
बोलना
बोलते
बोलते
ही
गुज़ारी
ये
उम्र
- Aashish kargeti 'Kash'
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भुलाने
में
जिसे
सारी
लगा
दी
उम्र
जो
मैने
उसी
के
नाम
पे
आकर
ये
मेरा
दिल
ठहरता
है
Kushal "PARINDA"
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बूढ़ी
बोझल
सूखी
आँखें
देख
रही
हैं
हैरत
से
कच्ची
उम्र
के
लड़कों
ने
कुछ
ऐसी
बातें
लिक्खी
हैं
Shadab Javed
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
shashwat singh darpan
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मैं
ज़िन्दगी
में
आज
पहली
बार
घर
नहीं
गया
मगर
तमाम
रात
दिल
से
माँ
का
डर
नहीं
गया
बस
एक
दुख
जो
मेरे
दिल
से
उम्र
भर
न
जाएगा
उसको
किसी
के
साथ
देख
कर
मैं
मर
नहीं
गया
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Tehzeeb Hafi
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वो
पेड़
जिस
की
छाँव
में
कटी
थी
उम्र
गाँव
में
मैं
चूम
चूम
थक
गया
मगर
ये
दिल
भरा
नहीं
Hammad Niyazi
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सुब्ह
होती
है
शाम
होती
है
उम्र
यूँँही
तमाम
होती
है
Munshi Amirullah Tasleem
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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मुझ
को
दिलबर
दिन-भर
सुन
कुछ
अच्छी
बातें
कर
सुन
हर
धड़कन
पर
नाम
तिरा
सीने
पर
सर
रख
कर
सुन
फट
से
हो
जा
मेरी
अब
ग़ौर
से
मेरा
मंतर
सुन
जो
बाहर
है
रहने
दे
जो
तेरे
है
भीतर
सुन
दूर
के
ढोल
लगे
अच्छे
पास
से
इनको
आ
कर
सुन
क्या
आऊँगा
दिन
में
याद
जाना
है
कल
दफ़्तर
सुन
दिल
तो
सारे
झूठे
है
क्या
कहता
ये
पत्थर
सुन
तेरे
चक्कर
में
'आशीष'
सालों
भटका
दर
दर
सुन
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Aashish kargeti 'Kash'
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बाजुओं
की
हेरा-फेरी
में
यार
पैर
की
नस
चड़क
गई
कैसे
Aashish kargeti 'Kash'
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मना
तो
किया
था
मगर
यार
उठा
कर
के
लाया
गया
है
Aashish kargeti 'Kash'
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के
सब
है
सुनाया
पुराना
ये
इक
शे'र
मेरा
नया
है
Aashish kargeti 'Kash'
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दिल
को
यूँँ
समझा
लेता
हूँ
ग़ज़लें
गाने
गा
लेता
हूँ
ऊँचे
सुर
भी
भाते
मुझ
को
धीरे
से
भी
गा
लेता
हूँ
अपने
मन
को
बहलाने
को
सबका
मन
बहला
लेता
हूँ
एक
बुरी
आदत
है
मेरी
मैं
सब
को
अपना
लेता
हूँ
शा'इर
भी
हूँ
'आशिक़
भी
हूँ
हर
झगड़ा
सुलझा
लेता
हूँ
आशिक़
बढ़ते
है
बस्ती
में
जब
उसको
बुलवा
लेता
हूँ
तुम
जो
समझो
मेरा
क्या
है
मैं
उसको
समझा
लेता
हूँ
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Aashish kargeti 'Kash'
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