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Aashish kargeti 'Kash'
bajuon ki hera-pheri men yaar
bajuon ki hera-pheri men yaar | बाजुओं की हेरा-फेरी में यार
- Aashish kargeti 'Kash'
बाजुओं
की
हेरा-फेरी
में
यार
पैर
की
नस
चड़क
गई
कैसे
- Aashish kargeti 'Kash'
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अपनी
बाँहो
से
क्यूँँ
हटाऊँ
उसे
सो
रहा
है
तो
क्यूँँ
जगाऊँ
उसे
जो
भी
मिलता
है
उसका
पूछता
है
यार
किस
किस
से
मैं
छुपाऊँ
उसे
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Kafeel Rana
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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यूँँ
तो
सर्कस
में
हम
बहुत
ख़ुश
हैं
फिर
भी
जंगल
तो
यार
जंगल
था
Harman Dinesh
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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के
सब
है
सुनाया
पुराना
ये
इक
शे'र
मेरा
नया
है
Aashish kargeti 'Kash'
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शमा
डगमगाने
लगी
है
तेरी
याद
आने
लगी
है
Aashish kargeti 'Kash'
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दम
तेरी
इस
बात
में
है
क्या
?
सूखापन
बरसात
में
है
क्या
?
इश्क़
मुहब्बत
ज़ाहिर
करना
बस
केवल
अस्वात
में
है
क्या
?
पल
पल
मुझ
को
जो
खाते
हैं
ऐसा
उन
लम्हात
में
है
क्या
?
दिल
की
धड़कन
रुक
सकती
है
ऐसा
कुछ
सौगात
में
है
क्या
?
रुख़्सत
तुझ
को
होते
देखे
'आशू'
इन
हालात
में
है
क्या
?
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आख़िरी
आशिक़ी
मय-कशी
रह
गई
ज़िंदगी
भर
में
जब
तीरगी
रह
गई
है
मिला
कुछ
घड़ी
का
सुकूँ
और
फिर
कुछ
घड़ी
पास
में
आख़िरी
रह
गई
हो
गया
ख़त्म
सब
जो
भी
था
दरमियाँ
जब
फ़क़त
दरमियाँ
बे-रुख़ी
रह
गई
ख़ामुशी
से
अलग
हो
गए
वक़्त
पर
वक़्त
की
धार
में
आशिक़ी
रह
गई
हश्र
ये
पेड़
को
काटने
से
हुआ
ये
ज़मीं
बीच
से
खोखली
रह
गई
तू
मिरी
ज़िंदगी
बन
गई
है
मगर
जो
मिरा
ख़्वाब
थी
शा'इरी
रह
गई
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Aashish kargeti 'Kash'
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तुम
कहते
हो
ऐसी
वैसी
आती
है
देखो
मुझ
से
ख़ुशबू
कैसी
आती
है
Aashish kargeti 'Kash'
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