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Meem Alif Shaz
kaun aayega yahaañ mujh ko hansaane ke li.e
kaun aayega yahaañ mujh ko hansaane ke li.e | कौन आएगा यहाँ मुझ को हँसाने के लिए
- Meem Alif Shaz
कौन
आएगा
यहाँ
मुझ
को
हँसाने
के
लिए
लोग
जब
मशग़ूल
हैं
ग़म
को
हराने
के
लिए
देख
काफ़ी
कुछ
छुपा
है
तेरी
क़िस्मत
में
मगर
तुझ
को
चलना
तो
पड़ेगा
उस
ख़ज़ाने
के
लिए
- Meem Alif Shaz
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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सितारे
कुछ
बताते
हैं
नतीजा
कुछ
निकलता
है
बड़ी
हैरत
में
हैं
मेरा
मुक़द्दर
देखने
वाले
Madan Mohan Danish
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मैं
उन्हीं
आबादियों
में
जी
रहा
होता
कहीं
तुम
अगर
हँसते
नहीं
उस
दिन
मेरी
तक़दीर
पर
Zia Mazkoor
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
न
थे
तुम
अगर
फूल
न
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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तेरे
क़दमों
की
आहट
कमरे
में
गूँज
रही
है
अपनी
अधूरी
ग़ज़लों
में
साँसे
मैं
कैसे
डालूँ
Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
का
यही
तो
है
तक़ाज़ा
सज़ा
को
भूल
कर
अपना
बनालो
Meem Alif Shaz
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ज़ख़्म
मेरे
ज़ख़्म
जैसे
तो
नहीं
हैं
बेवफ़ाई
के
निशाँ
हैं
ज़ख़्म
जैसे
Meem Alif Shaz
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लहजे
में
अपने
नर्मी
तू
भी
लाया
कर
मुझ
को
बुलाया
कर,
मिरे
घर
आया
कर
तन्हाई
की
इस
धूप
में
मैं
जल
गया
अपनी
मोहब्बत
का
इधर
भी
साया
कर
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Meem Alif Shaz
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परिंदों
को
बुलाते
रहना
अपने
पास
शजर
कटने
का
उनको
ग़म
नहीं
होगा
Meem Alif Shaz
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