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Meem Alif Shaz
lehje men apne narmi tu bhi laaya kar
lehje men apne narmi tu bhi laaya kar | लहजे में अपने नर्मी तू भी लाया कर
- Meem Alif Shaz
लहजे
में
अपने
नर्मी
तू
भी
लाया
कर
मुझ
को
बुलाया
कर,
मिरे
घर
आया
कर
तन्हाई
की
इस
धूप
में
मैं
जल
गया
अपनी
मोहब्बत
का
इधर
भी
साया
कर
- Meem Alif Shaz
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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मैं
हूँ
दिल
है
तन्हाई
है
तुम
भी
होते
अच्छा
होता
Firaq Gorakhpuri
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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अपनी
इस
आदत
पे
ही
इक
रोज़
मारे
जाएँगे
कोई
दर
खोले
न
खोले
हम
पुकारे
जाएँगे
Waseem Barelvi
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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अपनी
तन्हाई
मिरे
नाम
पे
आबाद
करे
कौन
होगा
जो
मुझे
उस
की
तरह
याद
करे
Parveen Shakir
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यह
किरदार
नहीं
देखा
जाएगा
अब
पहचान
हमारी
बँगले
होंगे
Meem Alif Shaz
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अदालत
झूठ
सुनती
है
मोहब्बत
से
मगर
सच
के
लिए
ग़ुस्सा
मुकर्रर
है
Meem Alif Shaz
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जब
दोस्ती
तुम
निभाने
लगोगे
होली
ख़ुशी
से
मनाने
लगोगे
Meem Alif Shaz
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पहले
ज़माने
में
कहाँ
रुसवाई
थी
तहज़ीब
ज़िंदा
थी,
बड़ों
का
था
अदब
Meem Alif Shaz
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आज
अपने
ऐसे
भी
हैं
अरशद
घर
जलाते
हैं
ख़ुश
हो
जाते
हैं
Meem Alif Shaz
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