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Meem Alif Shaz
pahle zamaane men kahaan ruswaai thii
pahle zamaane men kahaan ruswaai thii | पहले ज़माने में कहाँ रुसवाई थी
- Meem Alif Shaz
पहले
ज़माने
में
कहाँ
रुसवाई
थी
तहज़ीब
ज़िंदा
थी,
बड़ों
का
था
अदब
- Meem Alif Shaz
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मौसम-ए-होली
है
दिन
आए
हैं
रंग
और
राग
के
हम
से
तुम
कुछ
माँगने
आओ
बहाने
फाग
के
Mushafi Ghulam Hamdani
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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वो
करेंगे
वस्ल
का
वा'दा
वफ़ा
रंग
गहरे
हैं
हमारी
शाम
के
Muztar Khairabadi
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होली
के
इस
पावन
रंग
में
प्यार
का
रंग
मिला
दूँगा
तुम
कितना
भी
बच
लो
जानम
तुमको
मैं
नहला
दूँगा
Nirbhay Nishchhal
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गले
मुझ
को
लगा
लो
ऐ
मेरे
दिलदार
होली
में
बुझे
दिल
की
लगी
भी
तो
ऐ
मेरे
यार
होली
में
गुलाबी
गाल
पर
कुछ
रंग
मुझ
को
भी
जमाने
दो
मनाने
दो
मुझे
भी
जान-ए-मन
त्यौहार
होली
में
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Bhartendu Harishchandra
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आइने
में
देख
सकती
हो
अभी
रंग
मेरा
तुम
पे
अच्छा
लग
रहा
Neeraj Neer
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बिखर
के
फूल
फ़ज़ाओं
में
बास
छोड़
गया
तमाम
रंग
यहीं
आस-पास
छोड़
गया
Aanis Moin
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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ये
रंग
रंग
परिंदे
ही
हम
से
अच्छे
हैं
जो
इक
दरख़्त
पे
रहते
हैं
बेलियों
की
तरह
Khaqan Khavar
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अब
के
होली
पे
लगा
रंग
उतरता
ही
नहीं
किस
ने
इस
बार
हमें
रंग
लगाया
हुआ
है
Zia Zameer
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जो
बावफ़ा
नहीं,
वफ़ा
का
उस
से
भी
सवाल
क्या
उसे
तो
कुछ
पता
नहीं
हराम
क्या
हलाल
क्या
परिंदों
के
परों
को
काटे
है
जो
ज़ात
के
लिए
उसे
तो
कुछ
पता
नहीं
ख़ुदा
का
है
जलाल
क्या
जो
काट
दे
जवानी
अपनी
बस
बुरे
ही
कामों
में
उसे
तो
कुछ
पता
नहीं
ये
हुस्न
का
कमाल
क्या
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Meem Alif Shaz
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अगर
फिर
शहर
में
फैली
है
कोई
आग
शिद्दत
से
किसी
की
तो
ज़बाँ
से
निकला
होगा
कोई
अंगारा
Meem Alif Shaz
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मुठ्ठी
में
रेत
ज़रा
सा
फिर
भी
है
यक़ीं
हम
भी
बनालेंगे
घर
Meem Alif Shaz
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बड़ा
आसान
था
बचपन
हमारा
ज़रा
सी
बात
पे
रोए
नहीं
हम
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी
से
हम
ख़फ़ा
हो
के
कहाँ
जाएँगे
शाज़
हम
जहाँ
जाएँगे
ये
दुश्वारियाँ
होगी
वहाँ
Meem Alif Shaz
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