hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Meem Alif Shaz
agar phir shahar men phaili hai koi aag shiddat se
agar phir shahar men phaili hai koi aag shiddat se | अगर फिर शहर में फैली है कोई आग शिद्दत से
- Meem Alif Shaz
अगर
फिर
शहर
में
फैली
है
कोई
आग
शिद्दत
से
किसी
की
तो
ज़बाँ
से
निकला
होगा
कोई
अंगारा
- Meem Alif Shaz
Download Sher Image
फिर
चाहे
तो
न
आना
ओ
आन
बान
वाले
झूटा
ही
वअ'दा
कर
ले
सच्ची
ज़बान
वाले
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
22 Likes
हिन्दी
महक
रही
है
लोबान
जैसी
मेरी
लहजे
को
मैं
ने
अपने
उर्दू
किया
हुआ
है
Prof. Rehman Musawwir
Send
Download Image
28 Likes
बोसा
देते
नहीं
और
दिल
पे
है
हर
लहज़ा
निगाह
जी
में
कहते
हैं
कि
मुफ़्त
आए
तो
माल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
Send
Download Image
37 Likes
तारीकियों
को
आग
लगे
और
दिया
जले
ये
रात
बैन
करती
रहे
और
दिया
जले
उस
की
ज़बाँ
में
इतना
असर
है
कि
निस्फ़
शब
वो
रौशनी
की
बात
करे
और
दिया
जले
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
103 Likes
तेरी
रंजिश
खुली
तर्ज-ए-बयाँ
से
न
थी
दिल
में
तो
क्यूँँ
निकली
ज़बाँ
से
Dagh Dehlvi
Send
Download Image
45 Likes
हफ़ीज़'
अपनी
बोली
मोहब्बत
की
बोली
न
उर्दू
न
हिन्दी
न
हिन्दोस्तानी
Hafeez Jalandhari
Send
Download Image
32 Likes
तेरे
एहसास
को
ख़ुशबू
बनाते
जो
बस
चलता
तुझे
उर्दू
बनाते
यक़ीनन
इस
से
तो
बेहतर
ही
होती
वो
इक
दुनिया
जो
मैं
और
तू
बनाते
Read Full
Saurabh Sharma 'sadaf'
Send
Download Image
38 Likes
कहाँ
हम
ग़ज़ल
का
हुनर
जानते
हैं
मगर
इस
ज़बाँ
का
असर
जानते
हैं
ये
वो
हुस्न
जिसको
निखारा
गया
है
नया
कुछ
नहीं
हम
ख़बर
जानते
हैं
कि
है
जो
क़फ़स
में
वो
पंछी
रिहा
हो
परिंदें
ज़मीं
के
शजर
जानते
हैं
फ़क़त
रूह
के
नाम
है
इश्क़
लेकिन
बदन
के
हवाले
से
घर
जानते
हैं
फ़ुलाँ
है
फ़ुलाँ
का
यक़ीं
हैं
हमें
भी
सुनो
हम
उसे
सर-ब-सर
जानते
हैं
कि
अब
यूँँ
सिखाओ
न
रस्म-ए-सियासत
झुकाना
कहाँ
है
ये
सर
जानते
हैं
Read Full
Neeraj Neer
Download Image
16 Likes
मैं
हिंदी
और
उर्दू
को
अलग
कैसे
करूँँ
यारों
अगर
साँसें
हटा
दूँ
तो
बदन
में
कुछ
नहीं
बचता
Umesh Maurya
Send
Download Image
1 Like
रखे
है
लज़्ज़त-ए-बोसा
से
मुझ
को
गर
महरूम
तो
अपने
तू
भी
न
होंटों
तलक
ज़बाँ
पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
Send
Download Image
19 Likes
Read More
मैं
तो
सितारों
से
मिलने
निकला
हूँ
तुम
तो
चिराग़ों
में
ही
उलझे
रहना
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
उस
पे
कोई
फ़र्क
पड़ता
ही
नहीं
गुनाह
से
ख़ुश
है
कुछ
ज़ियादा
ही
वो
अपनी
वाह
वाह
से
देखने
में
वो
ख़राब
लगता
ही
नहीं
मगर
नेकी
करता
रहता
है
शरारती
निगाह
से
झूठ
बोलने
के
लिए
उसी
से
कहना
है
तुम्हें
उस
को
कोई
डर
नहीं
है
ख़ार
वाली
राह
से
Read Full
Meem Alif Shaz
Download Image
0 Likes
अचानक
जो
हुआ
वो
हादसा
था
मगर
तेरी
जफ़ा
को
क्या
कहेंगे
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
अपना
दिल
उस
की
हथेली
पे
न
रख
पाए
कभी
इक
अजब
सा
ख़ौफ़
था
इनकार
होने
का
हमें
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
रक़ीबों
की
शरारत
तुम
को
क्या
मालूम
हमारी
हर
मुसीबत
तुम
को
क्या
मालूम
न
देखो
इन
गरीबों
को
हिक़ारत
से
कि
आने
वाली
सूरत
तुम
को
क्या
मालूम
Read Full
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Patriotic Shayari
Rang Shayari
Aansoo Shayari
Aah Shayari
Jashn Shayari