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Meem Alif Shaz
us pe koii farq padta hi nahin gunaah se
us pe koii farq padta hi nahin gunaah se | उस पे कोई फ़र्क पड़ता ही नहीं गुनाह से
- Meem Alif Shaz
उस
पे
कोई
फ़र्क
पड़ता
ही
नहीं
गुनाह
से
ख़ुश
है
कुछ
ज़ियादा
ही
वो
अपनी
वाह
वाह
से
देखने
में
वो
ख़राब
लगता
ही
नहीं
मगर
नेकी
करता
रहता
है
शरारती
निगाह
से
झूठ
बोलने
के
लिए
उसी
से
कहना
है
तुम्हें
उस
को
कोई
डर
नहीं
है
ख़ार
वाली
राह
से
- Meem Alif Shaz
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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'मीर'
हम
मिल
के
बहुत
ख़ुश
हुए
तुम
से
प्यारे
इस
ख़राबे
में
मिरी
जान
तुम
आबाद
रहो
Meer Taqi Meer
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कब
बार-ए-तबस्सुम
मिरे
होंटों
से
उठेगा
ये
बोझ
भी
लगता
है
उठाएगा
कोई
और
Aanis Moin
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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साल
के
तीन
सौ
पैंसठ
दिन
में
एक
भी
रात
नहीं
है
उसकी
वो
मुझे
छोड़
दे
और
ख़ुश
भी
रहे
इतनी
औक़ात
नहीं
है
उसकी
Muzdum Khan
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इक
और
किताब
ख़त्म
की
फिर
उस
को
फाड़
कर
काग़ज़
का
इक
जहाज़
बनाया
ख़ुशी
हुई
Ameer Imam
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
Jaun Elia
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यह
बारिश
फिर
होगी
बरसात
का
मौसम
है
इक
घर
फिर
ढ़ह
जाएगा
मात
का
मौसम
है
Meem Alif Shaz
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दुश्मनों
से
भी
मिलने
को
दिल
चाहेगा
जब
दोस्त
निकल
जाएगें
इस
दिल
से
Meem Alif Shaz
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पास
मेरे
बैठ
जा,
कर
एक
दो
शिकवे
कभी
तो
मैं
ख़ुशामद
कर
के
अब
तुझ
को
मनाना
चाहता
हूँ
Meem Alif Shaz
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उस
के
घर
में
भी
बच्चे
खेलें
उस
ने
यह
सोचा
था
लेकिन
कम
रोज़ी
की
वजह
से
उस
ने
ख़ुद
को
रोका
था
Meem Alif Shaz
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नज़ाकत
से
शरारत
हो
रही
है
तेरी
आँखों
से
उल्फ़त
हो
रही
है
बदन
भीगा
हुआ
है
चाँद
का
भी
सितारों
से
ख़्यानत
हो
रही
है
हवाओं
की
शिकायत
क्या
करें
हम
चिराग़ों
में
अदावत
हो
रही
है
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Meem Alif Shaz
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