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Meem Alif Shaz
yah baarish phir hogii barsaat ka mausam hai
yah baarish phir hogii barsaat ka mausam hai | यह बारिश फिर होगी बरसात का मौसम है
- Meem Alif Shaz
यह
बारिश
फिर
होगी
बरसात
का
मौसम
है
इक
घर
फिर
ढ़ह
जाएगा
मात
का
मौसम
है
- Meem Alif Shaz
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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हम
को
मालूम
है
जन्नत
की
हक़ीक़त
लेकिन
दिल
के
ख़ुश
रखने
को
'ग़ालिब'
ये
ख़याल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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काश
जन्नत
हमें
मिले
ऐसी
हर
तरफ़
आशिक़ाना
मौसम
हो
Amaan Pathan
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बड़े
तो
बड़े
ही
रहेंगे
मगर
बड़े
भी
मोहब्बत
दिखाएँ
कभी
Meem Alif Shaz
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हमारे
ज़ेहन
में
वो
शाम
तक
इतना
रहा
ऐ
शाज़
कि
अपने
घर
पहुँचते
ही
उसे
आवाज़
दी
हम
ने
Meem Alif Shaz
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कितनी
अच्छी
लगती
है
ख़ामोशी
की
सरगोशी
जैसे
तितलियाँ
करती
रहती
हैं
फूलों
से
नोशी
Meem Alif Shaz
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हिज्र
का
वक़्त
गुज़र
जाएगा
रेत
का
टीला
बिखर
जाएगा
इश्क़
तो
होने
दे
फिर
उस
के
बाद
रंग
तेरा
भी
निखर
जाएगा
यह
तरक़्क़ी
का
सफ़र
लम्बा
है
थक
गया
जो
वो
किधर
जाएगा
दर्द
होते
ही
कहीं
सीने
में
मौत
का
खौफ़
ठहर
जाएगा
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Meem Alif Shaz
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चाँद
मेरे
आँगन
में
आया
था
जब
से
हम
तो
तुझ
को
देखते
रहते
हैं
बस
Meem Alif Shaz
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