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Meem Alif Shaz
parindon ko bulaate rahna apne paas
parindon ko bulaate rahna apne paas | परिंदों को बुलाते रहना अपने पास
- Meem Alif Shaz
परिंदों
को
बुलाते
रहना
अपने
पास
शजर
कटने
का
उनको
ग़म
नहीं
होगा
- Meem Alif Shaz
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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कोई
अटका
हुआ
है
पल
शायद
वक़्त
में
पड़
गया
है
बल
शायद
दिल
अगर
है
तो
दर्द
भी
होगा
इस
का
कोई
नहीं
है
हल
शायद
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Gulzar
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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दीदा
ओ
दिल
ने
दर्द
की
अपने
बात
भी
की
तो
किस
से
की
वो
तो
दर्द
का
बानी
ठहरा
वो
क्या
दर्द
बटाएगा
Ibn E Insha
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इस
क़दर
जज़्ब
हो
गए
दोनों
दर्द
खेंचूँ
तो
दिल
निकल
आए
Abbas Qamar
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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तू
सुब्ह
है,
तू
शाम
है,
तू
रात
है
तू
साथ
है
मेरे
यही
तो
बात
है
Meem Alif Shaz
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तू
मिला
हाथ
भी
दुश्मनों
से
मगर
तेरा
हर
दोस्त
यूँँही
मुकम्मल
रहे
Meem Alif Shaz
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सितारे
भी
हमारे
साथ
जगते
हैं
ख़ुदा
तो
सब
पे
रखता
है
नज़र
अपनी
Meem Alif Shaz
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कोई
पूछे
तो
यह
मन्नत
लिख
दूँ
मैं
माँ
के
हाथों
को
जन्नत
लिख
दूँ
Meem Alif Shaz
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अदालत
का
ये
चेहरा
तो
नहीं
था
यहाँ
पे
ज़ुल्म
गहरा
तो
नहीं
था
सभी
को
थी
मोहब्बत
मज़हबों
से
किसी
मज़हब
को
ढाया
तो
नहीं
था
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Meem Alif Shaz
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