hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Jatin shukla
maatra pachpan-saath hi ghar hain hamaare gaav men
maatra pachpan-saath hi ghar hain hamaare gaav men | मात्र पचपन-साठ ही घर हैं हमारे गाँव में
- Jatin shukla
मात्र
पचपन-साठ
ही
घर
हैं
हमारे
गाँव
में
हाँ
मगर
ऊँचे
कई
सर
हैं
हमारे
गाँव
में
खेतिहर
उन
में
ज़ियादा
और
अपनी
फ़ौज
के
नौ
सिपाही
पाँच
अफ़सर
हैं
हमारे
गाँव
में
- Jatin shukla
Download Sher Image
नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
Read Full
Jaun Elia
Send
Download Image
183 Likes
ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
Read Full
Khalid Sajjad
Send
Download Image
24 Likes
लुटा
दी
है
जवानी
जिसने
अपना
घर
बनाने
में
वही
बूढ़ा
हुआ
तो
घर
से
बेघर
हो
गया
है
अब
Nirbhay Nishchhal
Send
Download Image
4 Likes
बचपना
ऐ
लड़को
तुम
सेे
कभी
छूटता
ही
नहीं
जवान
होना
तो
बस
लड़कियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
Send
Download Image
64 Likes
ये
जो
ढलती
हुई
जवानी
है
हर
नए
साल
की
कहानी
है
देख
आँखें
मेरी
बता
मुझको
इस
में
किस
नाम
की
निशानी
है
Read Full
Aman Mishra 'Anant'
Send
Download Image
3 Likes
जीने
का
इरादा
है
मगर
फिर
भी
कहीं
से
कोई
तो
इशारा
हो
मिरा
अज़्म
जवाँ
हो
Sohit Singla
Send
Download Image
5 Likes
ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
Read Full
Paplu Lucknawi
Send
Download Image
29 Likes
सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
Send
Download Image
27 Likes
कच्ची
'उम्रों
में
हमें
काम
पर
लगा
दिया
गया
हम
वो
बच्चे
जो
जवानी
से
अलग
कर
दिए
गए
Shakeel Azmi
Send
Download Image
53 Likes
मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
Read Full
Paplu Lucknawi
Send
Download Image
42 Likes
Read More
प्राण
को
देह
से
दूरी
दे
देगा
कल
राज्य
धर्म
ऐसी
मजबूरी
दे
देगा
कल
एक
धोबी
ने
अपराध
तय
कर
दिया
एक
राजा
भी
मंज़ूरी
दे
देगा
कल
Read Full
Jatin shukla
Send
Download Image
0 Likes
वर्ना
तोहफ़े
दिल्ली
भेजे
जाते
पर
चूड़ी
का
अपमान
नहीं
कर
सकता
मैं
Jatin shukla
Send
Download Image
0 Likes
मोहब्बत
मत
करो
इतनी
मुझे
तुम
यही
कह,
फ़ोन
पर
रोती
रही
वो
Jatin shukla
Send
Download Image
3 Likes
अभी
तो
पांँच
बोसे
ही
हुए
हैं
अभी
दस
और
दो
तब
फ़ोन
रखना
Jatin shukla
Send
Download Image
0 Likes
ज़रूरत
हुक्म
तो
देती
नहीं
पर
थकावट
शाम
को
घर
खींच
लाती
Jatin shukla
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Aahat Shayari
Nigaah Shayari
Mehman Shayari
Partition Shayari
Raat Shayari