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Jatin shukla
praan ko deh se doori de dega kal
praan ko deh se doori de dega kal | प्राण को देह से दूरी दे देगा कल
- Jatin shukla
प्राण
को
देह
से
दूरी
दे
देगा
कल
राज्य
धर्म
ऐसी
मजबूरी
दे
देगा
कल
एक
धोबी
ने
अपराध
तय
कर
दिया
एक
राजा
भी
मंज़ूरी
दे
देगा
कल
- Jatin shukla
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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घर
से
मस्जिद
है
बहुत
दूर
चलो
यूँँ
कर
लें
किसी
रोते
हुए
बच्चे
को
हँसाया
जाए
Nida Fazli
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पहले
पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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इक
दिन
के
लिए
घर
को
परी-ख़ाना
बना
दे
अल्लाह
मुझे
उनका
ग़ुसल-ख़ाना
बना
दे
मोटी
है
बहुत
बीवी
तो
हुश्यार
रहा
कर
वो
मूड
में
आकर
तेरा
सुरमा
ना
बना
दे
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Paplu Lucknawi
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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घी
मिस्री
भी
भेज
कभी
अख़बारों
में
कई
दिनों
से
चाय
है
कड़वी
या
अल्लाह
Nida Fazli
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अब
तो
मज़हब
कोई
ऐसा
भी
चलाया
जाए
जिस
में
इंसान
को
इंसान
बनाया
जाए
Gopaldas Neeraj
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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क़ौम-ओ-मज़हब
क्या
किसी
का
और
क्या
है
रंग-ओ-नस्ल
ऐसी
बातें
छोड़
कर
बस
इल्म-ओ-फ़न
की
बात
हो
Sayan quraishi
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पूर्ण
अधिकार
जिस
पर
हमारा
रहा
एक
मुखड़ा
जो
आँखों
का
तारा
रहा
एक
लड़का
बदन
जिसका
ब्याहा
गया
एक
लड़का
जो
मन
से
कुँवारा
रहा
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Jatin shukla
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मात्र
पचपन-साठ
ही
घर
हैं
हमारे
गाँव
में
हाँ
मगर
ऊँचे
कई
सर
हैं
हमारे
गाँव
में
खेतिहर
उन
में
ज़ियादा
और
अपनी
फ़ौज
के
नौ
सिपाही
पाँच
अफ़सर
हैं
हमारे
गाँव
में
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Jatin shukla
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तुम्हारी
कॉल
आए
या
न
आए
तुम्हारी
याद
तो
आती
रहेगी
Jatin shukla
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वर्ना
तोहफ़े
दिल्ली
भेजे
जाते
पर
चूड़ी
का
अपमान
नहीं
कर
सकता
मैं
Jatin shukla
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अभी
तो
पांँच
बोसे
ही
हुए
हैं
अभी
दस
और
दो
तब
फ़ोन
रखना
Jatin shukla
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