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Jatin shukla
zaroorat hukm to deti nahin par
zaroorat hukm to deti nahin par | ज़रूरत हुक्म तो देती नहीं पर
- Jatin shukla
ज़रूरत
हुक्म
तो
देती
नहीं
पर
थकावट
शाम
को
घर
खींच
लाती
- Jatin shukla
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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आज
उसने
कहा
कॉल
करके
मुझे
छोड़
सिगरेट
दो
तुम
अभी
के
अभी
Jatin shukla
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अभी
तो
पांँच
बोसे
ही
हुए
हैं
अभी
दस
और
दो
तब
फ़ोन
रखना
Jatin shukla
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दो
झुके
नयनों
ने
जो
दिनभर
किया
संवाद
लेकर
मैं
अयोध्या
लौट
आया
लखनऊ
से
याद
लेकर
तीन
झुमका
चार
बोसा
पाँच
झप्पी
आठ
कंगन
रख
दिया
है
पर्स
में
पूरा
अमीनाबाद
लेकर
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Jatin shukla
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बहुत
ग़ुस्से
भरा
लहजा
तुम्हारा
मगर
मीठा
लगा
बोसा
तुम्हारा
गुलाबी
गाल,
बिंदी,
और
काजल
चमकता
चाँद
सा
मुखड़ा
तुम्हारा
बड़ी
हलचल
मची
बारातियों
में
अचानक
देख
कर
ठुमका
तुम्हारा
हमारी
शेरवानी
जँच
रही
तो
क़यामत
ढा
रहा
लहँगा
तुम्हारा
किसी
के
पास
तो
महफ़ूज़
होगा
बरेली
में
गिरा
झुमका
तुम्हारा
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Jatin shukla
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