bazm be-rabt hai soz-e-aahang se geet ulfat ke gaane se kya faaeda | बज़्म बे-रब्त है सोज़-ए-आहंग से गीत उल्फ़त के गाने से क्या फ़ाएदा

  - Khawaja Imtiaz Kavish
बज़्मबे-रब्तहैसोज़-ए-आहंगसेगीतउल्फ़तकेगानेसेक्याफ़ाएदा
बाग़सदियोंसेबे-नूरहैदिलरुबातेरायूँँगुलखिलानेसेक्याफ़ाएदा
हमभीआएगएइसजहाँमेंमगरकोईहमकोहमसामिलाहैकभी
जिसमेंकोईभीदिलरखनेवालाहोउसजहाँमेंसमानेसेक्याफ़ाएदा
जोमोहब्बतसमझताहोकरताभीहोवोहैफिरतालिएअपनेतिश्नासेलब
जोमोहब्बतसमझेमगरबेचदेउसकोशर्बतपिलानेसेक्याफ़ाएदा
तीरगीतीरगीहैइधरसेउधरशम्अजलतेहीआतिश-फ़िशाँघरहुआ
दिलरौशनहोजबइल्मकेनूरसेअपनेघरकोजलानेसेक्याफ़ाएदा
मेरीउल्फ़तकोठुकराकेतूचलबसामेरीचाहतसमझकरपशेमाँहुआ
जोहक़ीक़तथीउसकोतोसमझानहींअबकहानीबनानेसेक्याफ़ाएदा
येख़ुशी-ओ-मसर्रतकाआलममगरतूसमझताहैमेरामुक़द्दरनहीं
तुझकोहासिलहुआहैहोगाकभीमेरायूँँदिलदुखानेसेक्याफ़ाएदा
नासेहोअपनेघरमेंभीझाँकाकरोकितनेहैंजोतरसतेहैंउल्फ़तकोवाँ
दिलजोसदियोंसेअबतकमिलेहीनहींहाथयूँँहीमिलानेसेक्याफ़ाएदा
हमतोसमझेथेदुनियाहैपीछेवहाँइसलिएऔरआगेहीबढ़तेगए
ढूँढनेवालेजानेकहाँखोगएनक़्श-ए-पायूँँबनानेसेक्याफ़ाएदा
वोतुम्हाराहुआहैहोगाकभी'काविश'आओज़रादेखलोतुममगर
उसकेदिलपरअसरजबकरपाएतुमशा'इरीकेख़ज़ानेसेक्याफ़ाएदा
  - Khawaja Imtiaz Kavish
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