dushman ki dushmani ka safar kar raha hooñ main | दुश्मन की दुश्मनी का सफ़र कर रहा हूँ मैं

  - Khawaja Imtiaz Kavish
दुश्मनकीदुश्मनीकासफ़रकररहाहूँमैं
इकउम्रआगहीकासफ़रकररहाहूँमैं
फूलोंकोछोड़करहूँमैंकाँटोंपेगया
यूँँदिलकीबंदगीकासफ़रकररहाहूँमैं
निकलाहूँअपनेदिलकेपरिंदेकोढूँढने
यानीकिज़िंदगीकासफ़रकररहाहूँमैं
दरियासेरुख़बदलकेयूँँलब-सोख़्ताकहीं
जंगलमेंतिश्नगीकासफ़रकररहाहूँमैं
हरपललहूकीआँचपेकाग़ज़कोघोलना
यूँँदश्त-ए-शायरीकासफ़रकररहाहूँमैं
ख़ुदजीरहाहूँजानेमैंकितनेग़मोंकेसाथ
बसइकतिरीख़ुशीकासफ़रकररहाहूँमैं
इकदिलनेमेरेदिलकोहैलूटाजहानसे
इकदिलकीदिलबरीकासफ़रकररहाहूँमैं
दिनगर्मी-ए-जहानकीख़ातिरख़फ़ारहा
रातोंकोरौशनीकासफ़रकररहाहूँमैं
  - Khawaja Imtiaz Kavish
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