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Gulfam Ajmeri
gair ke saath vo nazar aaya
gair ke saath vo nazar aaya | ग़ैर के साथ वो नज़र आया
- Gulfam Ajmeri
ग़ैर
के
साथ
वो
नज़र
आया
अश्क
आँखों
से
फिर
उतर
आया
साक़ी
मुझ
को
शराब
मत
देना
आज
जी
पी
के
मेरा
भर
आया
थक
गई
आँखें
रास्ता
तकते
लौट
के
वो
न
उम्र
भर
आया
पी
थी
जिसको
भुलाने
की
ख़ातिर
याद
वो
मुझ
को
रात
भर
आया
बाद
तेरे
न
कुछ
सुना
मैंने
बाद
तेरे
न
कुछ
नज़र
आया
- Gulfam Ajmeri
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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ऐ
शैख़
तू
शराब
के
पीछे
न
पड़
कभी
ये
ख़ुद
को
वाहियात
बनाने
की
चीज़
है
Shivsagar Sahar
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बढ़ाई
मय
जो
मोहब्बत
से
आज
साक़ी
ने
ये
काँपे
हाथ
कि
साग़र
भी
हम
उठा
न
सके
Majrooh Sultanpuri
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आए
कुछ
अब्र
कुछ
शराब
आए
इस
के
बाद
आए
जो
अज़ाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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सब
को
मारा
'जिगर'
के
शे'रों
ने
और
'जिगर'
को
शराब
ने
मारा
Jigar Moradabadi
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न
गुल
खिले
हैं,
न
उन
से
मिले,
न
मय
पी
है
अजीब
रंग
में
अब
के
बहार
गुज़री
है
Faiz Ahmad Faiz
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शायद
शराब
पीके
तुम्हें
फ़ोन
मैं
करूँँ
बस
इसलिए
शराब
कभी
पी
नहीं
मैंने
Tanoj Dadhich
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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दुनिया
को
मारा
जिगर
के
शे'रों
ने
जिगर
को
शराब
ने
मारा
Jigar Moradabadi
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बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
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Deepankar
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ज़ेहनी
बीमार
किए
देता
है
दिल
को
बाज़ार
किए
देता
है
सोचता
हूँ
मैं
कि
अब
मर
जाऊँ
दार
दस्तार
किए
देता
है
रो
भी
सकता
हूँ
दिखाऊँ
हँस
कर
हाल
अदाकार
किए
देता
है
उसको
अब
कुछ
भी
नहीं
देना
तुम
चीज़
बेकार
किए
देता
है
फिर
मिरी
नींद
को
किसने
तोड़ा
ख़्वाब
मिस्मार
किए
देता
है
जुस्तजू
क़त्ल
नहीं
हो
सकती
पर
मिरा
यार
किए
देता
है
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Gulfam Ajmeri
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जब
हाथ
उसका
पकड़ा
तो
कहने
लगी
मेरी
सुनो
शादी
से
पहले
कुछ
नहीं
Gulfam Ajmeri
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जुस्तुजू
भी
न
रही
और
न
कोई
निस्बत
अब
तो
हालात
के
मारे
भी
नहीं
आएँगे
Gulfam Ajmeri
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ज़ख़्म
गहरा
नहीं
के
तुम
से
कहें
दिल
भी
करता
नहीं
के
तुम
से
कहें
दर्द
को
ज़ब्त
कर
के
बैठ
गए
हम
से
होता
नहीं
के
तुम
से
कहें
हम
ने
तो
पूछना
नहीं
जो
सुना
तुम
ने
कहना
नहीं
के
तुम
से
कहें
आँख
से
आँसू
ही
तो
निकला
है
कोई
दरिया
नहीं
के
तुम
से
कहें
वैसे
दिल
करता
है
के
तुम
से
कहूँ
मेरा
बनता
नहीं
के
तुम
से
कहें
मुक़्तसर
वक़्त
ले
के
आए
हो
वरना
क्या
क्या
नहीं
के
तुम
से
कहें
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Gulfam Ajmeri
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मिरा
तो
शा'इरी
से
बस
गुज़ारा
चल
रहा
है
तिरा
ज़ख़्मों
का
कारोबार
अच्छा
चल
रहा
है
तिरा
तो
हिज्र
भी
पुर-लुत्फ़
सा
लगता
है
मुझ
को
मुसलसल
अब
यही
चलने
दे
जैसा
चल
रहा
है
मैं
मंज़िल
पर
नहीं
पहुँचा
अभी
तक
ना-ख़ुदा
क्यूँ
ये
कश्ती
रुक
गई
है
या
किनारा
चल
रहा
है
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Gulfam Ajmeri
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