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Gulfam Ajmeri
justuju bhi na rahi aur na koii nisbat
justuju bhi na rahi aur na koii nisbat | जुस्तुजू भी न रही और न कोई निस्बत
- Gulfam Ajmeri
जुस्तुजू
भी
न
रही
और
न
कोई
निस्बत
अब
तो
हालात
के
मारे
भी
नहीं
आएँगे
- Gulfam Ajmeri
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गिला
कुछ
भी
नहीं
है
मौत
से
मुझको
पर
ख़ुदा
लेने
अगर
आया
तो
जाऊँगा
मैं
Gulfam Ajmeri
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अब
तो
मैं
भी
हर
मरासिम
को
भुला
सकता
हूँ
दोस्त
गर
यक़ीं
आता
नहीं
दिल
से
उतर
के
देख
ले
Gulfam Ajmeri
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रात
वो
मेरे
घर
थे
आए
हुए
सारे
गर्द
ओ
ग़ुबार
छटते
हुए
कैसे
रौशन
करे
हँसी
कोई
जो
मुहब्बत
के
हो
सताए
हुए
रात
हम
करवटें
बदलते
रहे
ख़्वाब
आए
तिरे
दिखाए
हुए
याद
करते
तो
याद
आते
नहीं
भूलते
भी
नहीं
भुलाए
हुए
ये
अदाकारी
कुछ
न
आई
काम
रो
दिए
हम
तो
मुस्कुराते
हुए
मुझ
को
होता
नहीं
यक़ीं
क़ासिद
रो
पड़े
मुझ
को
याद
करते
हुए
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इश्क़
में
ज़ख़्म
भी
तो
देगा
कोई
उम्र
भर
इनको
फिर
भरेगा
कोई
देख
ले
मेरा
हाल
जो
दुनिया
फिर
मुहब्बत
नहीं
करेगा
कोई
तू
चला
जाएगा
किसी
के
साथ
और
तुझे
ढूॅंढता
फिरेगा
कोई
अब
मैं
अपने
भी
घर
नहीं
जाता
तो
मिरी
राह
क्यूँँ
तकेगा
कोई
मेरे
सब
रास्ते
ग़लत
निकले
तो
मिरे
साथ
क्यूँँ
चलेगा
कोई
अब
मिरी
लाश
फेंक
दो
साहब
ज़ुर्म
ऐसा
नहीं
करेगा
कोई
और
तब
क्या
कहेगा
तू
'गुलफ़ाम'
उसके
बारे
में
पूछ
लेगा
कोई
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Gulfam Ajmeri
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ये
लेगी
आजमाइश
ज़िंदगी
कब
तक
यक़ीं
करता
रहेगा
आदमी
कब
तक
कहा
ग़म
से
के
छुट्टी
चाहिए
मुझ
को
मुझे
फिर
पूछा
ग़म
ने
वापसी
कब
तक
इधर
जल्दी
थी
घर
वालों
को
शादी
की
बता
तेरा
पता
मैं
ढूँढती
कब
तक
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