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Gulfam Ajmeri
ab to main bhi har maraasim ko bhula saktaa hooñ dost
ab to main bhi har maraasim ko bhula saktaa hooñ dost | अब तो मैं भी हर मरासिम को भुला सकता हूँ दोस्त
- Gulfam Ajmeri
अब
तो
मैं
भी
हर
मरासिम
को
भुला
सकता
हूँ
दोस्त
गर
यक़ीं
आता
नहीं
दिल
से
उतर
के
देख
ले
- Gulfam Ajmeri
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अगर
दिल
जो
किसी
का
ताज़ा
टूटे
कोई
आवाज़
दे
तो
सपना
टूटे
बनाए
रखना
दूरी
बज़्म
में
आप
न
जाने
ज़ेहन
का
कब
शीशा
टूटे
नहीं
भर
सकता
फिर
वो
ज़ख़्म
कोई
अगर
जो
वक़्त
पहले
टाँका
टूटे
कोई
कैसे
मिरे
दुख
जान
पाए
?
कोई
तो
हो
जो
मेरे
जैसा
टूटे
मुहब्बत
अब
नहीं
करनी
हमें
यार
कोई
टूटे
भी
तो
फिर
कितना
टूटे
मिरी
माँ
का
तू
भी
तो
दर्द
समझे
मोहब्बत
में
तिरा
भी
लड़का
टूटे
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कोई
सहरा
कोई
जंगल
कोई
दरिया
पड़ता
ढूँढते
तुझ
को
तिरी
खोज
में
चलना
पड़ता
काश
इक
रोज़
तू
जो
घर
को
बुलाती
अपने
काश
उस
रोज़
हमें
फिर
कहीं
छिपना
पड़ता
हिज्र
आसान
नहीं
है
मिरी
जाँ
हम
से
पूछ
दूसरा
गर
कोई
होता
उसे
मरना
पड़ता
जल्दबाज़ी
में
ख़रीदा
है
ये
जो
दिल
'गुलफ़ाम'
और
बाज़ार
में
टकराते
तो
सस्ता
पड़ता
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Gulfam Ajmeri
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ऐसा
न
हो
मुझ
पर
तरस
खा
जाए
तू
आँखों
का
क्या
आँखें
तो
बहती
रहती
है
Gulfam Ajmeri
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चश्म
उसकी
है
और
नज़ारा
भी
मौज
उसकी
है
और
किनारा
भी
लौट
कर
फिर
तू
ही
नहीं
आया
हम
ने
तुझ
को
बहुत
पुकारा
भी
बज़्म
से
उसकी
हम
को
जाना
था
और
फिर
मिल
गया
इशारा
भी
एक
ही
शख़्स
कैसे
मुम्किन
हैं
हो
तुम्हारा
भी
और
हमारा
भी
ज़ख़्म
भी
अब
तो
ताज़े
खा
'गुलफ़ाम'
इन
से
होता
नहीं
गुज़ारा
भी
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Gulfam Ajmeri
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सुन
तिरे
बाद
क्या
क्या
हुआ
मेरे
साथ
वो
हुआ
जो
नहीं
होना
था
मेरे
साथ
कौन
करता
है
बर्बाद
किस
को
यहाँ
ज़िंदगी
शर्त
कोई
लगा
मेरे
साथ
वो
जो
आया
था
देने
दिलासा
मुझे
यूँँ
हुआ
वो
भी
रोने
लगा
मेरे
साथ
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