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Gulfam Ajmeri
apna har zaKHm ham ne haraa kar diya
apna har zaKHm ham ne haraa kar diya | अपना हर ज़ख़्म हम ने हरा कर दिया
- Gulfam Ajmeri
अपना
हर
ज़ख़्म
हम
ने
हरा
कर
दिया
जो
मुहब्बत
में
हम
से
हुआ
कर
दिया
देख
चेहरे
पे
मुस्कान
हैरत
न
कर
क़ैदस
किस
ने
मुजरिम
रिहा
कर
दिया
आते
हो
फिर
भी
"गुलफ़ाम"
को
ढूँढने
आप
को
इक
दफ़ा
जब
मना
कर
दिया
- Gulfam Ajmeri
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ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
Kafeel Rana
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मुहब्बत
रतजगे
आवारागर्दी
ज़रूरी
काम
सारे
हो
रहे
हैं
Madan Mohan Danish
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दिल
जिसका
मोहब्बत
में
गिरफ़्तार
रहा
है
वो
मेरी
मदद
के
लिए
तैयार
रहा
है
आग़ाज़-ए-मोहब्बत
का
फ़साना
भी
था
दिलचस्प
बर्बादी
का
क़िस्सा
भी
मज़ेदार
रहा
है
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Obaid Azam Azmi
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मुझे
उस
सेे
मुहब्बत
सच
बड़ी
महँगी
पड़ेगी
अकेलेपन
से
उसने
इश्क़
ऐसा
कर
लिया
है
Anukriti 'Tabassum'
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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अब
मैं
क्या
अपनी
मोहब्बत
का
भरम
भी
न
रखूँ
मान
लेता
हूँ
कि
उस
शख़्स
में
था
कुछ
भी
नहीं
Jawwad Sheikh
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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मेरी
तन्हाई
देखेंगे
तो
हैरत
ही
करेंगे
लोग
मोहब्बत
छोड़
देंगे
या
मोहब्बत
ही
करेंगे
लोग
Ismail Raaz
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मुहब्बत
उठ
गई
दोनों
घरों
से
सुना
है
एक
ख़त
पकड़ा
गया
है
Anjum Ludhianvi
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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चश्म
उसकी
है
और
नज़ारा
भी
मौज
उसकी
है
और
किनारा
भी
लौट
कर
फिर
तू
ही
नहीं
आया
हम
ने
तुझ
को
बहुत
पुकारा
भी
बज़्म
से
उसकी
हम
को
जाना
था
और
फिर
मिल
गया
इशारा
भी
एक
ही
शख़्स
कैसे
मुमकिन
हैं
हो
तुम्हारा
भी
और
हमारा
भी
ज़ख़्म
भी
अब
तो
ताज़े
खा
'गुलफ़ाम'
इन
से
होता
नहीं
गुज़ारा
भी
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Gulfam Ajmeri
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ये
लेगी
आजमाइश
ज़िंदगी
कब
तक
यक़ीं
करता
रहेगा
आदमी
कब
तक
कहा
ग़म
से
के
छुट्टी
चाहिए
मुझ
को
मुझे
फिर
पूछा
ग़म
ने
वापसी
कब
तक
इधर
जल्दी
थी
घर
वालों
को
शादी
की
बता
तेरा
पता
मैं
ढूँढती
कब
तक
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Gulfam Ajmeri
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मुझ
से
पहली
मर्तबा
तू
जब
मिला
था
बज़्म
में
उस
वक़्त
तू
सब
से
जुदा
था
हिज्र
में
रोया
नहीं
फिर
मेरा
दिल
भी
इस
को
तो
तेरे
बिछड़ने
का
पता
था
क़ैस
भी
मारा
गया
राँझा
भी
वरना
चाहे
जो
कर
सकता
था
तू
तो
ख़ुदा
था
ख़ुद-कुशी
करता
नहीं
मैं
पर
मिरे
साथ
ज़िंदगी
तुझ
को
पता
है
क्या
हुआ
था
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Gulfam Ajmeri
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किसी
का
अगर
दिल
दुखाए
हुए
हो
नज़र
का
भी
जादू
चलाए
हुए
हो
तुम्हारे
भी
चेहरे
से
मुझ
को
लगा
है
मुहब्बत
के
तुम
भी
सताए
हुए
हो
बता
जाने
का
दूसरा
कोई
क़िस्सा
कहानी
ये
तो
तुम
सुनाए
हुए
हो
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Gulfam Ajmeri
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आँधी
चलती
है
रात-भर
मुझ
में
टूट
कर
गिर
गए
शजर
मुझ
में
ज़ख़्म
ले
के
मैं
अब
कहाँ
जाऊँ
शे'र
कहता
है
चारा-गर
मुझ
में
कौन
था
जिस
से
ये
मुहब्बत
थी
कौन
फिर
कर
गया
असर
मुझ
में
रहगुज़र
किस
तरफ़
मुझे
लाया
रो
पड़ा
मेरा
हम-सफ़र
मुझ
में
आतिश-ए-दिल
है
दरमियाँ
ऐसी
जल
रहा
हो
किसी
का
घर
मुझ
में
क़ैद-ख़ाने
में
ख़ुश
थे
जो
पंछी
उड़ते
हैं
अब
इधर
उधर
मुझ
में
कोहकन
तोड़ता
है
जाने
क्या
क्या
बनाता
है
कूज़ा-गर
मुझ
में
तू
ही
इक
दिन
उजाड़
दे
मुझ
को
एक
दिन
तू
ही
बन-सँवर
मुझ
में
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Gulfam Ajmeri
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