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Gulfam Ajmeri
kisi ka agar dil dukhaaye hue ho
kisi ka agar dil dukhaaye hue ho | किसी का अगर दिल दुखाए हुए हो
- Gulfam Ajmeri
किसी
का
अगर
दिल
दुखाए
हुए
हो
नज़र
का
भी
जादू
चलाए
हुए
हो
तुम्हारे
भी
चेहरे
से
मुझ
को
लगा
है
मुहब्बत
के
तुम
भी
सताए
हुए
हो
बता
जाने
का
दूसरा
कोई
क़िस्सा
कहानी
ये
तो
तुम
सुनाए
हुए
हो
- Gulfam Ajmeri
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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ऐसे
इक़रार
में
इंकार
के
सौ
पहलू
हैं
वो
तो
कहिए
कि
लबों
पे
न
तबस्सुम
आए
Asad Bhopali
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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देखने
के
लिए
सारा
आलम
भी
कम
चाहने
के
लिए
एक
चेहरा
बहुत
Asad Badayuni
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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ये
लेगी
आजमाइश
ज़िंदगी
कब
तक
यक़ीं
करता
रहेगा
आदमी
कब
तक
कहा
ग़म
से
के
छुट्टी
चाहिए
मुझ
को
मुझे
फिर
पूछा
ग़म
ने
वापसी
कब
तक
इधर
जल्दी
थी
घर
वालों
को
शादी
की
बता
तेरा
पता
मैं
ढूँढती
कब
तक
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Gulfam Ajmeri
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ज़ख़्म
गहरा
नहीं
के
तुम
से
कहें
दिल
भी
करता
नहीं
के
तुम
से
कहें
दर्द
को
ज़ब्त
कर
के
बैठ
गए
हम
से
होता
नहीं
के
तुम
से
कहें
हम
ने
तो
पूछना
नहीं
जो
सुना
तुम
ने
कहना
नहीं
के
तुम
से
कहें
आँख
से
आँसू
ही
तो
निकला
है
कोई
दरिया
नहीं
के
तुम
से
कहें
वैसे
दिल
करता
है
के
तुम
से
कहूँ
मेरा
बनता
नहीं
के
तुम
से
कहें
मुक़्तसर
वक़्त
ले
के
आए
हो
वरना
क्या
क्या
नहीं
के
तुम
से
कहें
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Gulfam Ajmeri
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इश्क़
पहले
पहले
तो
अच्छा
लगेगा
अजनबी
भी
तुझ
को
फिर
तेरा
लगेगा
जिस
अदास
हम
ने
तुम
से
ज़ख़्म
खाए
कैसे
मरहम
कैसे
अब
टाँका
लगेगा
हम
को
जाना
है
इसी
दरिया
के
उस
पार
सुनने
में
आया
यहाँ
पहरा
लगेगा
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Gulfam Ajmeri
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सुन
तिरे
बाद
क्या
क्या
हुआ
मेरे
साथ
वो
हुआ
जो
नहीं
होना
था
मेरे
साथ
कौन
करता
है
बर्बाद
किस
को
यहाँ
ज़िंदगी
शर्त
कोई
लगा
मेरे
साथ
वो
जो
आया
था
देने
दिलासा
मुझे
यूँँ
हुआ
वो
भी
रोने
लगा
मेरे
साथ
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Gulfam Ajmeri
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सब
पूछते
हैं
इस
उदासी
का
सबब
रो
देते
हैं
लेकिन
उगलते
कुछ
नहीं
Gulfam Ajmeri
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