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Gulfam Ajmeri
sab poochte hain is udaasi ka sabab
sab poochte hain is udaasi ka sabab | सब पूछते हैं इस उदासी का सबब
- Gulfam Ajmeri
सब
पूछते
हैं
इस
उदासी
का
सबब
रो
देते
हैं
लेकिन
उगलते
कुछ
नहीं
- Gulfam Ajmeri
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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अगर
दिल
जो
किसी
का
ताज़ा
टूटे
कोई
आवाज़
दे
तो
सपना
टूटे
बनाए
रखना
दूरी
बज़्म
में
आप
न
जाने
ज़ेहन
का
कब
शीशा
टूटे
नहीं
भर
सकता
फिर
वो
ज़ख़्म
कोई
अगर
जो
वक़्त
पहले
टाँका
टूटे
कोई
कैसे
मिरे
दुख
जान
पाए
?
कोई
तो
हो
जो
मेरे
जैसा
टूटे
मुहब्बत
अब
नहीं
करनी
हमें
यार
कोई
टूटे
भी
तो
फिर
कितना
टूटे
मिरी
माँ
का
तू
भी
तो
दर्द
समझे
मोहब्बत
में
तिरा
भी
लड़का
टूटे
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Gulfam Ajmeri
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किसी
का
अगर
दिल
दुखाए
हुए
हो
नज़र
का
भी
जादू
चलाए
हुए
हो
तुम्हारे
भी
चेहरे
से
मुझ
को
लगा
है
मुहब्बत
के
तुम
भी
सताए
हुए
हो
बता
जाने
का
दूसरा
कोई
क़िस्सा
कहानी
ये
तो
तुम
सुनाए
हुए
हो
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Gulfam Ajmeri
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यूँँ
तो
तिरे
इस
शहर
में
बीमार
बहुत
है
मरने
के
लिए
तो
तेरा
इनकार
बहुत
है
जो
शहर
बसाने
को
मुहब्बत
लगी
होगी
वो
शहर
जलाने
को
तो
अख़बार
बहुत
है
बोसे
वो
तो
देती
रही
कुछ
हम
भी
न
बोले
हमको
तो
मिरी
जान
ये
दरकार
बहुत
है
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Gulfam Ajmeri
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कितनों
का
दिल
जला
रक्खा
है
सब
को
पागल
बना
रक्खा
है
ग़म
नहीं
मैं
अगर
मर
गया
सब
को
ही
सच
बता
रक्खा
है
कोई
ख़तरा
नहीं
अब
हमें
दर
पे
ताला
लगा
रक्खा
है
इतने
भी
हम
नहीं
हैं
शरीफ़
जितना
हल्ला
मचा
रक्खा
है
वरना
कट
जाए
दो
ख़ानदान
राज़
हम
ने
छिपा
रक्खा
है
क़त्ल
जिस
का
अभी
बाक़ी
है
वो
जनाज़ा
उठा
रक्खा
है
जो
भी
पीता
है
फट
पड़ता
है
जाम
में
क्या
मिला
रक्खा
है
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Gulfam Ajmeri
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तुझ
से
मिलें
बातें
करें
सो
आ
बैठे
हम
और
इरादे
से
नहीं
आए
हैं
Gulfam Ajmeri
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