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Dileep Kumar
kya sitam hai tum pe ghazlein likh rahen hain
kya sitam hai tum pe ghazlein likh rahen hain | क्या सितम है तुम पे ग़ज़लें लिख रहें हैं
- Dileep Kumar
क्या
सितम
है
तुम
पे
ग़ज़लें
लिख
रहें
हैं
हमको
ये
दुख
तो
कभी
लिखना
नहीं
था
- Dileep Kumar
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रोने
को
तो
ज़िंदगी
पड़ी
है
कुछ
तेरे
सितम
पे
मुस्कुरा
लें
Firaq Gorakhpuri
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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छोड़
ये
सब,
यूँँ
न
आशुफ़्ता
हो
तू
तो
ज़िंदगी
जब
तक
है,
हम
चलते
रहेंगे
Dileep Kumar
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ख़्वाब
ऐसा
जो
मुकम्मल
भी,
नहीं
भी
इश्क़
में
वो
मेरे
पागल
भी,
नहीं
भी
ज़िंदगी
गर
इम्तिहाँ
लेती
रहेगी
इम्तिहाँ
होंगे
मुसलसल
भी,
नहीं
भी
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Dileep Kumar
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वो
दुनिया
से
बिलकुल
जुदा
देखते
हैं
जो
कम-ज़र्फ़
में
हौसला
देखते
हैं
Dileep Kumar
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एक
तो
कुछ
भी
कहा
जाता
नहीं
और
फिर
चुप
भी
रहा
जाता
नहीं
इसलिए
भी
माफ़
कर
देता
है
वो
दरमियाँ
कुछ
हो,
सहा
जाता
नहीं
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Dileep Kumar
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फ़ाइदा
कुछ
भी
न
होना
ख़ामुशी
से
मसअला
हल
होना
हैं
तो
दोस्ती
से
साथ
भी
उसका
निभाना
चाहता
हूँ
भागता
हूँ
दूर
भी
लेकिन
उसी
से
बज़्म
में
रस्मन
बुला
लेते
हैं
वरना
हैं
किसे
मतलब
मिरी
मौजूदगी
से
मसअला
सारा
ख़ुशी
का
है
वगरना
हो
ही
जाता
है
गुज़ारा
दूसरी
से
हश्र
क्या
होगा
न
जाने
इस
जहाँ
का
हैं
परेशाँ
आदमी
ही
आदमी
से
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Dileep Kumar
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