hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dileep Kumar
vo duniya se bilkul juda dekhte hain
vo duniya se bilkul juda dekhte hain | वो दुनिया से बिलकुल जुदा देखते हैं
- Dileep Kumar
वो
दुनिया
से
बिलकुल
जुदा
देखते
हैं
जो
कम-ज़र्फ़
में
हौसला
देखते
हैं
- Dileep Kumar
Download Sher Image
ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
Send
Download Image
43 Likes
मज़ा
चखा
के
ही
माना
हूँ
मैं
भी
दुनिया
को
समझ
रही
थी
कि
ऐसे
ही
छोड़
दूँगा
उसे
Rahat Indori
Send
Download Image
41 Likes
अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
22 Likes
बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
55 Likes
सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
19 Likes
जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
Send
Download Image
27 Likes
तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
50 Likes
ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
76 Likes
जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
Send
Download Image
25 Likes
सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
Send
Download Image
42 Likes
Read More
जब
जब
ये
दिल
बंजर
कम
लगता
है
मुझको
अपना
ही
घर
कम
लगता
है
जब
से
मैं
ने
तेरी
आँखें
देखी
मुझको
तेरा
पैकर
कम
लगता
है
हर
इक
को
रस्ता
समझाने
वाले
तू
सब
को
ही
रहबर
कम
लगता
है
मुख़्बर
का
इक
ये
भी
फ़न
होता
है
मुख़्बर
सबको
मुख़्बर
कम
लगता
है
अपने
अफ़साने
शाबाशी
लूटे
हम-सर
का
हर
मंज़र
कम
लगता
है
Read Full
Dileep Kumar
Download Image
1 Like
ज़ेहन
में
पिंदार
ही
पिंदार
है
पर
अकेले
चलना
भी
दुश्वार
है
और
कोई
मसअला
भी
अब
नहीं
दरमियाँ
बस
एक
ही
दीवार
है
चाय
क्या
पीते
ख़बर
क्या
पढ़ते
हम
ख़ून
से
लथपथ
जो
ये
अख़बार
है
जीत
से
पहले
अलग
हैं,
बाद
में
नेता
लोगों
के
अलग
किरदार
है
हम
करें
शिकवा
भी
तो
किस
से
करें
जब
हमारे
दोस्त
ही
दो-चार
है
Read Full
Dileep Kumar
Download Image
1 Like
ग़ज़ल
के
क़ाफ़िए
बदले,
ग़ज़ल
बदली
ग़ज़ल
के
फिर
म'आनी
भी
नए
रक्खे
Dileep Kumar
Send
Download Image
3 Likes
खौफ़
है
कोई
जो
दिल
से
जाता
नहीं
इसलिए
मैं
तुझे
आज़माता
नहीं
उसके
लहजे
से
ही
मैं
समझ
जाता
हूँ
वो
तो
नाराज़गी
भी
जताता
नहीं
Read Full
Dileep Kumar
Send
Download Image
2 Likes
ये
नहीं
कि
बाद
में
आई
है
ये
उदासी
मुझ
में
अज़ल
से
है
Dileep Kumar
Send
Download Image
2 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Raat Shayari
Violence Shayari
Mehndi Shayari
Bijli Shayari
Broken Shayari