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Dileep Kumar
jab jab ye dil banjar kam lagta hai
jab jab ye dil banjar kam lagta hai | जब जब ये दिल बंजर कम लगता है
- Dileep Kumar
जब
जब
ये
दिल
बंजर
कम
लगता
है
मुझको
अपना
ही
घर
कम
लगता
है
जब
से
मैं
ने
तेरी
आँखें
देखी
मुझको
तेरा
पैकर
कम
लगता
है
हर
इक
को
रस्ता
समझाने
वाले
तू
सब
को
ही
रहबर
कम
लगता
है
मुख़्बर
का
इक
ये
भी
फ़न
होता
है
मुख़्बर
सबको
मुख़्बर
कम
लगता
है
अपने
अफ़साने
शाबाशी
लूटे
हम-सर
का
हर
मंज़र
कम
लगता
है
- Dileep Kumar
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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बात
करने
का
हसीं
तौर-तरीक़ा
सीखा
हम
ने
उर्दू
के
बहाने
से
सलीक़ा
सीखा
Manish Shukla
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कोशिश
भी
कर
उमीद
भी
रख
रास्ता
भी
चुन
फिर
इस
के
ब'अद
थोड़ा
मुक़द्दर
तलाश
कर
Nida Fazli
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ज़रा
सी
देर
को
सकते
में
आ
गए
थे
हम
कि
एक
दूजे
के
रस्ते
में
आ
गए
थे
हम
जो
अपना
हिस्सा
भी
औरों
में
बाँट
देता
है
एक
ऐसे
शख़्स
के
हिस्से
में
आ
गए
थे
हम
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Ismail Raaz
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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जहाँ
पहुँच
के
क़दम
डगमगाए
हैं
सब
के
उसी
मक़ाम
से
अब
अपना
रास्ता
होगा
Aabid Adeeb
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जब
भी
उस
कूचे
में
जाना
पड़ता
है
ज़ख़्मों
पर
तेज़ाब
लगाना
पड़ता
है
उसके
घर
से
दूर
नहीं
है
मेरा
घर
रस्ते
में
पर
एक
ज़माना
पड़ता
है
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Subhan Asad
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सफ़र
में
मुश्किलें
आएँ
तो
जुरअत
और
बढ़ती
है
कोई
जब
रास्ता
रोके
तो
हिम्मत
और
बढ़ती
है
Nawaz Deobandi
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सड़कों
पर
ये
जब
तलक
जलते
रहेंगे
इनके
बच्चे
फूलते
फलते
रहेंगे
साथ
देने
वाला
जब
कोई
न
होगा
शम्स
निकलेंगे
मगर
ढलते
रहेंगे
छोड़
ये
सब
यूँँ
न
आशुफ़्ता
हो
तू
तो
ज़िंदगी
जब
तक
है
हम
चलते
रहेंगे
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Dileep Kumar
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रोज़
थोड़ा
बहुत
ग़म
कमाते
रहे
फिर
उसी
को
कमाई
बताते
रहे
इश्क़
करते
रहे
उम्र
भर
और
फिर
उम्र
भर
इश्क़
से
खौफ़
खाते
रहे
और
कुछ
साफ़
किरदार
के
लोग
ही
देश
में
बस्तियों
को
जलाते
रहे
होश
में
आ
न
जाऊँ
कहीं
इस
लिए
जाम
पे
जाम
मुझ
को
पिलाते
रहे
जाननी
थी
सभी
को
कहानी
मिरी
हम
मगर
इक
फ़साना
सुनाते
रहे
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Dileep Kumar
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काश!
तुम
पहले
मुकम्मल
बात
करते
और
फिर
मुझ
सेे
मुसलसल
बात
करते
Dileep Kumar
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एक
रिश्ता
सब
निभाए
जा
रहे
हैं
झूठ
के
आँसू
बहाए
जा
रहे
हैं
कुछ
परिंदे
जो
सताए
जा
रहे
हैं
ये
सितारे
हैं
मिटाए
जा
रहे
हैं
यूँँ
अचानक
मिल
गया
है
वो
कि
हम
तो
बे-वजह
ही
मुस्कुराए
जा
रहे
हैं
बात
उस
सेे
जो
नहीं
हो
पाई
है
तो
इक
ग़ज़ल
हम
गुनगुनाए
जा
रहे
हैं
इश्क़
का
इज़हार
करने
आया
है
वो
और
हम
बातें
बनाए
जा
रहे
हैं
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Dileep Kumar
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ग़ज़ल
के
क़ाफ़िए
बदले,
ग़ज़ल
बदली
ग़ज़ल
के
फिर
म'आनी
भी
नए
रक्खे
Dileep Kumar
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