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Dileep Kumar
faida kuchh bhi na hona khaamoshi se
faida kuchh bhi na hona khaamoshi se | फ़ाइदा कुछ भी न होना ख़ामुशी से
- Dileep Kumar
फ़ाइदा
कुछ
भी
न
होना
ख़ामुशी
से
मसअला
हल
होना
हैं
तो
दोस्ती
से
साथ
भी
उसका
निभाना
चाहता
हूँ
भागता
हूँ
दूर
भी
लेकिन
उसी
से
बज़्म
में
रस्मन
बुला
लेते
हैं
वरना
हैं
किसे
मतलब
मिरी
मौजूदगी
से
मसअला
सारा
ख़ुशी
का
है
वगरना
हो
ही
जाता
है
गुज़ारा
दूसरी
से
हश्र
क्या
होगा
न
जाने
इस
जहाँ
का
हैं
परेशाँ
आदमी
ही
आदमी
से
- Dileep Kumar
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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दोस्ती
लफ्ज़
ही
में
दो
है
दो
सिर्फ़
तेरी
नहीं
चलेगी
दोस्त
Zubair Ali Tabish
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तिरे
लबों
में
मिरे
यार
ज़ाइक़ा
नहीं
है
हज़ार
बोसे
हैं
उन
पर
प
इक
दु'आ
नहीं
है
Pallav Mishra
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दोस्ती
और
किसी
ग़रज़
के
लिए
वो
तिजारत
है
दोस्ती
ही
नहीं
Ismail Merathi
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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ज़रा
विसाल
के
बाद
आइना
तो
देख
ऐ
दोस्त
तिरे
जमाल
की
दोशीज़गी
निखर
आई
Firaq Gorakhpuri
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यार
आसान
होती
नहीं
यह
कला
मौन
रहना
बड़ी
ही
चुनौती
रही
Aniket sagar
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हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरा
कोई
वजह
है
Dileep Kumar
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इश्क़
में
जीत
की
हवस
का
है
खेल
सारा
ये
दस्तरस
का
है
मय-कशी
रास
आएगी
न
हमें
ये
मज़ा
है
जो
यक-नफ़स
का
है
ठीक
से
अब
मुझे
समझ
आया
एक
दुख
जो
कई
बरस
का
है
उनकी
हम
बात
कर
नहीं
सकते
शहर
में
सब
उन्हीं
के
बस
का
है
फिर
से
दोनों
में
हो
गया
झगड़ा
फिर
से
ये
झगड़ा
हम-नफ़स
का
है
उड़ने
को
आसमाँ
नहीं
मिलता
इन
परिंदों
को
ग़म
क़फ़स
का
है
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Dileep Kumar
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दिन
भर
गर्मी
में
जलते
हैं
तब
जाकर
बच्चे
पलते
हैं
Dileep Kumar
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रोज़
थोड़ा
बहुत
ग़म
कमाते
रहे
फिर
उसी
को
कमाई
बताते
रहे
इश्क़
करते
रहे
उम्र
भर
और
फिर
उम्र
भर
इश्क़
से
खौफ़
खाते
रहे
और
कुछ
साफ़
किरदार
के
लोग
ही
देश
में
बस्तियों
को
जलाते
रहे
होश
में
आ
न
जाऊँ
कहीं
इस
लिए
जाम
पे
जाम
मुझ
को
पिलाते
रहे
जाननी
थी
सभी
को
कहानी
मिरी
हम
मगर
इक
फ़साना
सुनाते
रहे
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Dileep Kumar
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सानेहा
ये
होना
है
शादी
से
उसकी
इक
का
दिल
टूटेगा,
इक
का
घर
बसेगा
Dileep Kumar
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