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Dileep Kumar
chhod ye sab yuñ na aashufta ho tu to
chhod ye sab yuñ na aashufta ho tu to | छोड़ ये सब, यूँँ न आशुफ़्ता हो तू तो
- Dileep Kumar
छोड़
ये
सब,
यूँँ
न
आशुफ़्ता
हो
तू
तो
ज़िंदगी
जब
तक
है,
हम
चलते
रहेंगे
- Dileep Kumar
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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हाल
मत
पूछो
हमारी
ज़िंदगी
का
एक
चलती-फिरती
सी
दीवार
है
बस
Rachit Sonkar
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ज़िंदगी
ज़िंदा-दिली
का
है
नाम
मुर्दा-दिल
ख़ाक
जिया
करते
हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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तू
ख़फ़ा
है
और
मेरा
आजकल
दोस्तों
से
राब्ता
होता
नहीं
Dileep Kumar
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हमारे
इश्क़
की
इतनी
सी
क़ीमत
है
जहाँ
भर
की,
हमारे
साथ
ज़िल्लत
है
खड़े
हैं
दूर
तुझ
सेे
तेरी
महफ़िल
में
ख़ुदा
की
देख
हम
पे
कितनी
रहमत
है
हमारी
रातें
भी
उजड़ी
हुई
सी
है
चराग़ों
से
हमें
भी
थोड़ी
नफ़रत
है
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Dileep Kumar
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सानेहा
ये
होना
है
शादी
से
उसकी
इक
का
दिल
टूटेगा,
इक
का
घर
बसेगा
Dileep Kumar
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हम
लोग
हाल-ए-ज़ार
के
मारे
हुए
छत
पर
खड़े
हैं
अब
थके-हारे
हुए
Dileep Kumar
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जैसा
मैं
ने
चाहा
था
वैसा
नहीं
था
बातें
फिर
भी
ठीक
थी
लहजा
नहीं
था
Dileep Kumar
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