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Dharamraj deshraj
jo dukhaate hain dil gareebon ka
jo dukhaate hain dil gareebon ka | जो दुखाते हैं दिल गरीबों का
- Dharamraj deshraj
जो
दुखाते
हैं
दिल
गरीबों
का
वो
ग़ुनाहे-अज़ीम
करते
हैं
- Dharamraj deshraj
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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क्या
बात
हो
गई
है
जो
शरमा
रहे
हो
तुम
बतला
भी
दो
कि
रात
में
देखा
है
ख़्वाब
क्या
Dharamraj deshraj
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अश्क़
ग़म
में
मिरे
बहाएा
तो
रो
पड़ेंगे
जो
आज़माया
तो
चाहे
जैसी
भी
तुम
क़सम
ले
लो
वक़्त
गुज़रा
भी
याद
आया
तो
सोचते
हैं
ख़फ़ा
रहेंगे
पर
मान
जाऍंगे
गर
मनाया
तो
हम
सेे
बोसे
की
इल्तिज़ा
करके
उनको
अपना
ख़याल
आया
तो
अब
बुरा
मान
जाऍंगे
यारो
ख़ूॅं
मेरी
आँखों
से
चुराया
तो
रब
यक़ीनन
बहुत
ख़फ़ा
होगा
हमने
मज़लूम
को
सताया
तो
नाम
उनका
धरम
नहीं
लूँगा
आँसुओं
से
अगर
नहाएा
तो
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Dharamraj deshraj
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आह
जब
आसमान
तक
पहुँची
रौशनी
तब
मकान
तक
पहुँची
ज़ब्त
कब
तक
तेरे
सितम
करता
अब
शिकायत
बयान
तक
पहुँची
बढ़
गया
दर्द
या
हुआ
ऐसा
ज़िन्दगी
इम्तिहान
तक
पहुँची
दर्द
के
साथ
में
मुहब्बत
थी
शा'इरी
हर
ज़बान
तक
पहुँची
आ
रहा
इंक़िलाब
दुनिया
में
शुक्र
है
बात
कान
तक
पहुँची
आँख
से
ख़ूँ
बहा
है
तब
जाकर
शा'इरी
आसमान
तक
पहुँची
दर्द
जब
जब
'धरम'
ने
पाया
है
बेज़ुबानी
ज़बान
तक
पहुँची
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Dharamraj deshraj
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जाने
किस-किस
को
खा
गई
मिट्टी
ज़ीस्त
क्या
है
बता
गई
मिट्टी
जो
जहाँ
को
बता
चुके
अपना
उनको
अपना
बना
गई
मिट्टी
जिनका
दुनिया
में
नाम
चलता
था
उनको
मिट्टी
बना
गई
मिट्टी
ख़्वाब
कैसे
हसीन
अब
आए
सो
रहा
था
जगा
गई
मिट्टी
पास
सब
है
मगर
नहीं
कुछ
भी
आइना
जब
दिखा
गई
मिट्टी
आम
इंसान
की
बिसात
कहाँ
आसमानों
को
खा
गई
मिट्टी
दोस्त
दुश्मन
नहीं
कोई
उसके
सबकी
हस्ती
मिटा
गई
मिट्टी
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Dharamraj deshraj
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दर्द
सीने
में
पालकर
रखना
शर्त
पहली
है
शा'इरी
के
लिए
Dharamraj deshraj
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