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Dharamraj deshraj
kya baat ho gaii hai jo sharmaa rahe ho tum
kya baat ho gaii hai jo sharmaa rahe ho tum | क्या बात हो गई है जो शरमा रहे हो तुम
- Dharamraj deshraj
क्या
बात
हो
गई
है
जो
शरमा
रहे
हो
तुम
बतला
भी
दो
कि
रात
में
देखा
है
ख़्वाब
क्या
- Dharamraj deshraj
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जब
तुझे
याद
कर
लिया
सुब्ह
महक
महक
उठी
जब
तेरा
ग़म
जगा
लिया
रात
मचल
मचल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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नज़रें
हो
गड़ीं
जिनकी
वसीयत
पे
दिनो-रात
माँ-बाप
कि
'उम्रों
कि
दु'आ
खाक़
करेंगे
Asad Akbarabadi
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ज़ख़्म
दे
दीजिए
नया
दिल
को
पर
न
कहिए
भला-बुरा
दिल
को
वक़्ते-रुख़्सत
वो
आँख
में
आँसू
उसने
दी
सख़्त
ये
सज़ा
दिल
को
ये
तड़पता
है
दीद
पाने
को
कितना
सबने
किया
मना
दिल
को
जाते-जाते
कहा
कि
ख़ुश
रहिए
मार
डाले
न
ये
दु'आ
दिल
को
दिल
मचलता
है
कसमसाता
है
कौन
देकर
गया
सज़ा
दिल
को
आँख
में
दर्द
और
लब
पे
हँसी
भा
गई
उनकी
ये
अदा
दिल
को
ज़ीस्त
में
दिन
न
वो
कभी
आए
कोई
रोए
मिले
मज़ा
दिल
को
बेकरारी
में
उम्र
गुज़री
'धरम'
चैन
आख़िर
नहीं
मिला
दिल
को
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ख़ुदास
देखिये
फ़रियाद
करके
सुकूँ
दिल
को
मिलेगा
याद
करके
ग़मों
से
अपना
दिल
आबाद
करके
मज़ा
आने
लगा
रूदाद
करके
दुआएँ
पुरअसर
हमको
मिलेंगी
किसी
मज़लूम
की
इमदाद
करके
बिमारी
भूलने
की
छोड़
भी
जा
भुला
देना
हमें
तू
याद
करके
लहू
आँखों
का
गंगाजल
लगेगा
कभी
देखो
उसे
आज़ाद
करके
हमारे
पास
है
ग़म
का
ख़ज़ाना
मिलेगा
क्या
हमें
बर्बाद
करके
'धरम'सुख
चीज़
क्या
है
देख
लेना
दिले-नाक़ाम
को
तू
शाद
करके
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बनेगी
आँसुओं
से
बात
थोड़ी
बदल
जाएँगे
यूँँ
हालात
थोड़ी
किसी
के
आँसुओं
पे
मुस्कुराना
अरे
नादाँ
है
अच्छी
बात
थोड़ी
चलो
इक
दूसरे
के
बाँट
लें
ग़म
कटेगी
कश्मकश
में
रात
थोड़ी
भलाई
करके
ही
आँसू
कमाये
ज़माने
से
मिली
सौग़ात
थोड़ी
हुआ
होगा
यक़ीनन
कुछ
न
कुछ
तो
बड़ी
तकरार
है
बिन
बात
थोड़ी
ख़ज़ाना
दर्द
का
मुझको
मिला
है
कमाई
है
मेरी
खैरात
थोड़ी
ग़ज़ल
में
दर्द-ओ-ग़म
आँसू
मेरे
हैं
हक़ीक़त
है
धरम
ज़ज़्बात
थोड़ी
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मेरे
हक़
में
दु'आ
करे
कोई
जी
रहा
क्यूँ
पता
करे
कोई
चाहते
हो
ख़ुशी
मिले
हमको
क्यूँ
किसी
का
बुरा
करे
कोई
यार
रब
को
भुला
नहीं
देना
दर्द
बे-शक
दिया
करे
कोई
आह
होंठों
पे
आँख
में
आँसू
क्या
हुआ
है
पता
करे
कोई
हम
सेफ़र
की
तलाश
में
गुम
हूँ
बन
के
साया
चला
करे
कोई
अपने
मतलब
से
यार
मिलते
हैं
बेसबब
भी
मिला
करे
कोई
राज़
मेरी
ख़ुशी
का
है
इतना
शा'इरी
का
नशा
करे
कोई
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जो
मुमकिन
हो
तो
सीने
में
बसा
लो
ये
दिल
भी
आशियाना
चाहता
है
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