zakhm de deejie naya dil ko | ज़ख़्म दे दीजिए नया दिल को

  - Dharamraj deshraj
ज़ख़्मदेदीजिएनयादिलको
परकहिएभला-बुरादिलको
वक़्ते-रुख़्सतवोआँखमेंआँसू
उसनेदीसख़्तयेसज़ादिलको
येतड़पताहैदीदपानेको
कितनासबनेकियामनादिलको
जाते-जातेकहाकिख़ुशरहिए
मारडालेयेदु'आदिलको
दिलमचलताहैकसमसाताहै
कौनदेकरगयासज़ादिलको
आँखमेंदर्दऔरलबपेहँसी
भागईउनकीयेअदादिलको
ज़ीस्तमेंदिनवोकभीआए
कोईरोएमिलेमज़ादिलको
बेकरारीमेंउम्रगुज़री'धरम'
चैनआख़िरनहींमिलादिलको
  - Dharamraj deshraj
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