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Dharamraj deshraj
jiske seene men muhabbat ka khazana hogaa
jiske seene men muhabbat ka khazana hogaa | जिसके सीने में मुहब्बत का ख़ज़ाना होगा
- Dharamraj deshraj
जिसके
सीने
में
मुहब्बत
का
ख़ज़ाना
होगा
ऐसे
इंसान
की
ठोकर
में
ज़माना
होगा।
- Dharamraj deshraj
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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रेत
को
मुट्ठी
में
भर
कर
तय
करें
मीलों
सफ़र
इस
तरह
ख़ुशियाँ
पहुँचती
हैँ
यहाँ
आवाम
तक
Dharamraj deshraj
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जाते-जाते
वो
निशानी
दे
गया
मेरे
ज़ख़्मों
को
जवानी
दे
गया
साथ
उसके
ही
गईं
सारी
ख़ुशी
मेरे
अश्क़ों
को
रवानी
दे
गया
शुक्रिया
सौ
मर्तबा
उस
यार
का
ज़ीस्त
को
मेरे
जो
मानी
दे
गया
वक़्त
बेहद
ही
बुरा
जाते
हुए
बरक़तें
पर
आसमानी
दे
गया
यूँँ
जिओ
मरने
पे
दुनियाँ
ये
कहे
मौत
को
भी
ज़िंदगानी
दे
गया
ख्बाब
ख़ुशियों
का
भला
आया
मुझे
याद
कुछ
अपनी
सुहानी
दे
गया
बाद
मरने
के
जहाँ
बोले
'धरम'
अपने
ग़म
की
तर्जुमानी
दे
गया
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Dharamraj deshraj
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समय
हाथों
से
निकला
जा
रहा
है
परिंदा
वक़्त
का
समझा
रहा
है
मुसाफ़िर
की
तरह
हम
सब
यहाँ
हैं
कोई
आया
तो
कोई
जा
रहा
है
अभी
भी
वक़्त
है
यारो
सँभलिए
समय
अब
आईना
दिखला
रहा
है
जहाँ
इंसान
भी
गायब
मिलेगा
अभी
बस
वो
ज़माना
आ
रहा
है
जरा
सोचो
कि
ईमाँ
जब
न
होगा
अभी
तो
आदमी
इतरा
रहा
है
सलीक़े
से
हमें
रहना
ही
होगा
भले
मौसम
हमें
भटका
रहा
है
'धरम'
अब
तो
बुराई
छोड़
भी
दे
जो
दानिशमंद
है
समझा
रहा
है
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Dharamraj deshraj
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तुझको
इतना
गुमान
है
प्यारे
क्या
कोई
आसमान
है
प्यारे
हाले-दिल
तू
बता
जरा
रब
को
वो
बड़ा
मेहरबान
है
प्यारे
है
लबों
पर
जहान
का
पहरा
बेज़ुबानी
ज़ुबान
है
प्यारे
जिस्म
अपना
सँभालकर
रखिये
काँच
का
ये
मकान
है
प्यारे
मेरे
अश्कों
को
ग़ौर
से
देखो
मेरे
दिल
की
ज़ुबान
है
प्यारे
मुझको
ऊँचाइयों
से
क्या
निस्बत
ये
ज़मीं
आसमान
है
प्यारे
दर्द
दिल
में
छुपाके
हँसना
धरम
ये
तेरा
इम्तिहान
है
प्यारे
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Dharamraj deshraj
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जो
मुमकिन
हो
तो
सीने
में
बसा
लो
ये
दिल
भी
आशियाना
चाहता
है
Dharamraj deshraj
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