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Dharamraj deshraj
ret ko mutthi men bhar kar tay karen meelon safar
ret ko mutthi men bhar kar tay karen meelon safar | रेत को मुट्ठी में भर कर तय करें मीलों सफ़र
- Dharamraj deshraj
रेत
को
मुट्ठी
में
भर
कर
तय
करें
मीलों
सफ़र
इस
तरह
ख़ुशियाँ
पहुँचती
हैँ
यहाँ
आवाम
तक
- Dharamraj deshraj
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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मंज़िलें
क्या
हैं,
रास्ता
क्या
है
हौसला
हो
तो
फ़ासला
क्या
है
Aalok Shrivastav
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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रास्ता
भूल
के
आ
निकले
हैं
हम
तेरे
लोग
नहीं
थे
दुनिया
Ashraf Yousafi
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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जहाँ
पहुँच
के
क़दम
डगमगाए
हैं
सब
के
उसी
मक़ाम
से
अब
अपना
रास्ता
होगा
Aabid Adeeb
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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मेरा
दुश्मन
भी
मोतबर
न
हुआ
आँसुओं
का
मिरे
असर
न
हुआ।
आदमी
हैं
मगर
नहीं
इन्साँ
एक
जंगल
है
जो
नगर
न
हुआ।
उम्र
गुज़री
मिली
नहीं
मंज़िल
ख़त्म
आख़िर
मेरा
सफ़र
न
हुआ।
वो
मिरे
ग़म
में
यार
हँसता
है
वो
भी
पत्थर
है
राहबर
न
हुआ।
मुद्दतों
से
हँसी
नहीं
आई
ग़म
मिरा
है
कि
मुख़्तसर
न
हुआ।
ग़म
भुलाए
नहीं
बना
यारो
जाम
पीकर
भी
बेख़बर
न
हुआ।
बद्दुआएँ
बहुत
दीं
यारो
ने
मुझपे
अफ़सोस
कुछ
असर
न
हुआ।
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Dharamraj deshraj
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जिसको
रब
का
पता
नहीं
मिलता
उसको
ग़म
में
मज़ा
नहीं
मिलता
देवता
तो
बहुत
यहाँ
मिलते
आदमी
का
पता
नहीं
मिलता
अपने
रब
की
तलाश
में
गुम
हैं
वो
हमें
क्यूँँ
भला
नहीं
मिलता
जो
न
पागल
हुए
मुहब्बत
में
सिर्फ़
उसको
ख़ुदा
नहीं
मिलता
मौत
ही
तो
यहाँ
यक़ीनी
है
ज़िन्दगी
का
पता
नहीं
मिलता
लुत्फ़
आता
जिसे
रुलाने
में
बस
वही
ग़मज़दा
नहीं
मिलता
हाल-ए-दिल
जिस
में
'धर्म'
कह
देते
सिर्फ़
वो
क़ाफ़िया
नहीं
मिलता
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Dharamraj deshraj
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दुश्मनों
के
लिए
दु'आ
की
थी
अपने
ग़म
की
यही
दवा
की
थी
ग़म
में
हँसना
ख़ुशी
में
रो
देना
ज़िन्दगी
अपनी
यूँँ
फ़ना
की
थी
जो
सज़ा
मिल
रही
ज़माने
से
हमने
उतनी
नहीं
ख़ता
की
थी
ख़्वाब
ख़ुशियों
के
देखते
रहना
दर्द
की
हमने
यूँँ
दवा
की
थी
दर्द
सीने
में
पाल
कर
हमने
शा'इरी
की
यूँँ
इब्तिदा
की
थी
हमने
मंज़िल
की
जुस्तजू
करके
ज़िन्दगी
अपनी
ख़ुशनुमा
की
थी
सुख
का
एहसास
वो
'धरम'
कैसा
जब
किसी
के
लिए
दु'आ
की
थी
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Dharamraj deshraj
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नज़र
से
पिलाई
कहा
कुछ
नहीं
नशा
फिर
भी
यारों
हुआ
कुछ
नहीं
लिया
कुछ
नहीं
और
दिया
कुछ
नहीं
कहाँ
खो
गया
दिल
पता
कुछ
नहीं
ख़फ़ा
हो
तो
बेशक
मिरी
जान
लो
तग़ाफुल
से
बढ़कर
बुरा
कुछ
नहीं
भला
हूँ
बुरा
हूँ
पता
है
उसे
मिरे
रब
से
आख़िर
छुपा
कुछ
नहीं
असर
हो
दवा
में
तो
हो
किस
तरह
अगर
साथ
में
हो
दु'आ
कुछ
नहीं
फ़क़त
उनका
ख़्वाबों
में
बोसा
लिया
बहुत
कुछ
हुआ
और
हुआ
कुछ
नहीं
रहे
या
मिटे
बादशाहत
'धरम'
करे
जो
किसी
का
भला
कुछ
नहीं
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Dharamraj deshraj
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अभी
कल
ही
कोई
बतला
रहा
था
कोई
ग़म
में
मिरे
मुस्का
रहा
था
उन्होंने
आईना
ख़ुद
तोड़
डाला
जो
सच्चाई
उन्हें
समझा
रहा
था
मुहब्बत
उसने
अपनी
बेच
दी
है
मुहब्बत
जो
ख़ुदा
बतला
रहा
था
भला
हो
आप
निकले
बावफ़ा
ही
न
जाने
दिल
में
क्या-क्या
आ
रहा
था
हक़ीक़त
उसकी
ज़ाहिर
हो
गई
जो
वफ़ा
के
नाम
पर
शरमा
रहा
था
अभी
आँखें
खुली
हैं
यार
मेरी
अभी
तक
तो
मैं
धोखा
खा
रहा
था
ज़माने
की
"धरम"
इस
बज़्म
में
भी
कोई
आया
तो
कोई
जा
रहा
था
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