hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dharamraj deshraj
jo mumkin ho to seene men basa lo
jo mumkin ho to seene men basa lo | जो मुमकिन हो तो सीने में बसा लो
- Dharamraj deshraj
जो
मुमकिन
हो
तो
सीने
में
बसा
लो
ये
दिल
भी
आशियाना
चाहता
है
- Dharamraj deshraj
Download Sher Image
रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
305 Likes
बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
Send
Download Image
23 Likes
शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
Send
Download Image
3 Likes
काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
Send
Download Image
23 Likes
उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
21 Likes
हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
Send
Download Image
49 Likes
हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
Read Full
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
42 Likes
तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
39 Likes
आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
Send
Download Image
4 Likes
कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
Send
Download Image
153 Likes
Read More
जाने
किस-किस
को
खा
गई
मिट्टी
ज़ीस्त
क्या
है
बता
गई
मिट्टी
जो
जहाँ
को
बता
चुके
अपना
उनको
अपना
बना
गई
मिट्टी
जिनका
दुनिया
में
नाम
चलता
था
उनको
मिट्टी
बना
गई
मिट्टी
ख़्वाब
कैसे
हसीन
अब
आए
सो
रहा
था
जगा
गई
मिट्टी
पास
सब
है
मगर
नहीं
कुछ
भी
आइना
जब
दिखा
गई
मिट्टी
आम
इंसान
की
बिसात
कहाँ
आसमानों
को
खा
गई
मिट्टी
दोस्त
दुश्मन
नहीं
कोई
उसके
सबकी
हस्ती
मिटा
गई
मिट्टी
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
1 Like
अभी
कल
ही
कोई
बतला
रहा
था
कोई
ग़म
में
मिरे
मुस्का
रहा
था
उन्होंने
आईना
ख़ुद
तोड़
डाला
जो
सच्चाई
उन्हें
समझा
रहा
था
मुहब्बत
उसने
अपनी
बेच
दी
है
मुहब्बत
जो
ख़ुदा
बतला
रहा
था
भला
हो
आप
निकले
बावफ़ा
ही
न
जाने
दिल
में
क्या-क्या
आ
रहा
था
हक़ीक़त
उसकी
ज़ाहिर
हो
गई
जो
वफ़ा
के
नाम
पर
शरमा
रहा
था
अभी
आँखें
खुली
हैं
यार
मेरी
अभी
तक
तो
मैं
धोखा
खा
रहा
था
ज़माने
की
"धरम"
इस
बज़्म
में
भी
कोई
आया
तो
कोई
जा
रहा
था
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
2 Likes
रेत
को
मुट्ठी
में
भर
कर
तय
करें
मीलों
सफ़र
इस
तरह
ख़ुशियाँ
पहुँचती
हैँ
यहाँ
आवाम
तक
Dharamraj deshraj
Send
Download Image
2 Likes
दर्दो-ग़म
में
मुस्कुराना
आ
गया
वक़्त
शायद
शाइराना
आ
गया
वास्ता
जब
ख़ार
से
यारो
पड़ा
गुल
मुहब्बत
के
खिलाना
आ
गया
दोस्ती
ग़म
से
हुई
जिस
दिन
मिरी
बेसबब
आँसू
बहाना
आ
गया
ज़िन्दगी
की
कश्मकश
में
अब
मुझे
रोते-रोते
मुस्कुराना
आ
गया
बिक
रहा
ईमान
मेरे
शहर
में
या
ख़ुदा
कैसा
ज़माना
आ
गया
सुर्ख़
मौसम
जान
न
ले
ले
कहीं
याद
वो
जंगल
पुराना
आ
गया
चल
'धरम'
सच्चाई
का
परचम
उठा
आँधियों
का
अब
ज़माना
आ
गया
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
1 Like
ग़मज़दा
हूँ
ज़रा
दवा
भेजो
वर्ना
यारब
मुझे
बुला
भेजो
की
दु'आ
माँ
से
उस
जहाँ
से
मुझे
अपने
जैसा
कोई
ख़ुदा
भेजो
ख़त
लिखा
और
इल्तिज़ा
ये
की
दर्द
भेजो
तो
अलहदा
भेजो
फिर
नए
सब्ज़ो-बाग़
ही
लिखकर
मुझको
जीने
का
आसरा
भेजो
सुर्ख़
मौसम
जला
न
दे
यारब
फूल
,
ख़ुश्बू
नई
हवा
भेजो
ख़त
लबों
से
ज़रा-
ज़रा
छूकर
एक
लम्हा
ही
ख़ुशनुमा
भेजो
ऐब
मेरे
'धरम'
नज़र
आएँ
मुझको
ऐसा
इक
आईना
भेजो
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
2 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shikwa Shayari
Sooraj Shayari
Shadi Shayari
Terrorism Shayari
Aag Shayari