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Dharamraj deshraj
jaane kis-kis ko kha gaii miTTi
jaane kis-kis ko kha gaii miTTi | जाने किस-किस को खा गई मिट्टी
- Dharamraj deshraj
जाने
किस-किस
को
खा
गई
मिट्टी
ज़ीस्त
क्या
है
बता
गई
मिट्टी
जो
जहाँ
को
बता
चुके
अपना
उनको
अपना
बना
गई
मिट्टी
जिनका
दुनिया
में
नाम
चलता
था
उनको
मिट्टी
बना
गई
मिट्टी
ख़्वाब
कैसे
हसीन
अब
आए
सो
रहा
था
जगा
गई
मिट्टी
पास
सब
है
मगर
नहीं
कुछ
भी
आइना
जब
दिखा
गई
मिट्टी
आम
इंसान
की
बिसात
कहाँ
आसमानों
को
खा
गई
मिट्टी
दोस्त
दुश्मन
नहीं
कोई
उसके
सबकी
हस्ती
मिटा
गई
मिट्टी
- Dharamraj deshraj
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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इतना
आसान
नहीं
होता
है
शायर
कहलाना
दर्दों
को
कहने
से
पहले
सहना
भी
पड़ता
है
Harsh saxena
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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ये
ऐसा
क़र्ज़
है
जो
मैं
अदा
कर
ही
नहीं
सकता
मैं
जब
तक
घर
न
लौटूँ
मेरी
माँ
सज्दे
में
रहती
है
Munawwar Rana
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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कमरे
में
सिगरेटों
का
धुआँ
और
तेरी
महक
जैसे
शदीद
धुँध
में
बाग़ों
की
सैर
हो
Umair Najmi
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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अगर
दर्द
दिल
से
जुदा
हो
रहा
है
समझ
लीजिए
कुछ
बुरा
हो
रहा
है
गुलों
की
महक
आ
रही
है
चमन
से
यक़ीनन
किसी
का
भला
हो
रहा
है
वफ़ा
कर
रहे
हैं
जफ़ाओं
के
बदले
मुहब्बत
का
हक़
यूँँ
अदा
हो
रहा
है
नशा
हो
गया
है
उसे
धन
का
यारों
ज़माने
का
वो
अब
ख़ुदा
हो
रहा
है
सफ़र
सख़्त
काँटे
बिछे
रास्ते
में
अभी
वक़्त
से
सामना
हो
रहा
है
कई
ग़म
लगे
हैं
मिरी
ज़िन्दगी
में
बता
मेरे
यारब
ये
क्या
हो
रहा
है
'धरम'
उम्र
ऐसी
न
कुछ
सोचता
हूँ
भला
हो
रहा
या
बुरा
हो
रहा
है
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मेरे
हक़
में
दु'आ
करे
कोई
जी
रहा
क्यूँ
पता
करे
कोई
चाहते
हो
ख़ुशी
मिले
हमको
क्यूँ
किसी
का
बुरा
करे
कोई
यार
रब
को
भुला
नहीं
देना
दर्द
बे-शक
दिया
करे
कोई
आह
होंठों
पे
आँख
में
आँसू
क्या
हुआ
है
पता
करे
कोई
हम
सेफ़र
की
तलाश
में
गुम
हूँ
बन
के
साया
चला
करे
कोई
अपने
मतलब
से
यार
मिलते
हैं
बेसबब
भी
मिला
करे
कोई
राज़
मेरी
ख़ुशी
का
है
इतना
शा'इरी
का
नशा
करे
कोई
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जानिब-ए-मंज़िल
यूँँ
चलकर
देखना
आप
अपने
को
बदलकर
देखना
लोग
दुश्मन
आपके
हो
जाएँगे
चाँद
की
ख़ातिर
मचलकर
देखना
सामने
कितनी
भी
हों
दुशवारियाँ
अपनी
ख़ुद्दारी
पे
चलकर
देखना
मंज़िलें
आसाँ
सभी
हो
जाएँगी
बस
इरादों
को
बदलकर
देखना
आदमी
का
आप
जंगल
पाओगे
भीड़
में
घर
से
निकलकर
देखना
आज
नज़रों
पर
भी
हैं
पहरे
बहुत
जब
भी
देखो
तुम
संभलकर
देखना
पंख
लग
जाएँगे
ख़ुशियों
को
'धरम'
वासनाओं
को
कुचलकर
देखना
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पास
आकर
जरा
सा
वो
बैठे
मेरे
अश'आर
सुनके
रो
बैठे
वो
मिरे
ग़म
में
मुस्कुराये
हैं
अपनी
तहज़ीब
यार
खो
बैठे
जिसने
चैनो-क़रार
छीना
है
हम
जहाँ
में
उसी
के
हो
बैठे
फूल
ग़ज़लों
के
लहलहाएंगे
शब्द
काग़ज़
पे
आज
बो
बैठे
मुस्कुराने
की
दी
क़सम
उसने
ग़म
की
दौलत
भी
आज
खो
बैठे
अश्क़
अपने
छुपाना
चाहा
था
अपना
दामन
मगर
भिगो
बैठे
ग़म
के
दरिया
को
पार
करना
था
दिल
की
कश्ती
"धरम"डुबो
बैठे
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क्या
बात
हो
गई
है
जो
शरमा
रहे
हो
तुम
बतला
भी
दो
कि
रात
में
देखा
है
ख़्वाब
क्या
Dharamraj deshraj
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