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Dharamraj deshraj
khuda se dekhiye fariyaad karke
khuda se dekhiye fariyaad karke | ख़ुदास देखिये फ़रियाद करके
- Dharamraj deshraj
ख़ुदास
देखिये
फ़रियाद
करके
सुकूँ
दिल
को
मिलेगा
याद
करके
ग़मों
से
अपना
दिल
आबाद
करके
मज़ा
आने
लगा
रूदाद
करके
दुआएँ
पुरअसर
हमको
मिलेंगी
किसी
मज़लूम
की
इमदाद
करके
बिमारी
भूलने
की
छोड़
भी
जा
भुला
देना
हमें
तू
याद
करके
लहू
आँखों
का
गंगाजल
लगेगा
कभी
देखो
उसे
आज़ाद
करके
हमारे
पास
है
ग़म
का
ख़ज़ाना
मिलेगा
क्या
हमें
बर्बाद
करके
'धरम'सुख
चीज़
क्या
है
देख
लेना
दिले-नाक़ाम
को
तू
शाद
करके
- Dharamraj deshraj
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एक
चेहरा
है
जो
आँखों
में
बसा
रहता
है
इक
तसव्वुर
है
जो
तन्हा
नहीं
होने
देता
Javed Naseemi
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किस
मुँह
से
करें
उन
के
तग़ाफ़ुल
की
शिकायत
ख़ुद
हम
को
मोहब्बत
का
सबक़
याद
नहीं
है
Hafeez Banarasi
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वो
किसी
को
याद
कर
के
मुस्कुराया
था
उधर
और
मैं
नादान
ये
समझा
कि
वो
मेरा
हुआ
Iqbal Ashhar
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नहीं
आती
तो
याद
उनकी
महीनों
तक
नहीं
आती
मगर
जब
याद
आते
हैं
तो
अक्सर
याद
आते
हैं
Hasrat Mohani
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भुला
दिया
है
जो
तू
ने
तो
कुछ
मलाल
नहीं
कई
दिनों
से
मुझे
भी
तिरा
ख़याल
नहीं
Navin C. Chaturvedi
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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कभी
तो
कोसते
होंगे
सफ़र
को
कभी
जब
याद
करते
होंगे
घर
को
निकल
पड़ती
हैं
औलादें
कमाने
परिंदे
खोल
ही
लेते
हैं
पर
को
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Siddharth Saaz
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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हम
को
यारों
ने
याद
भी
न
रखा
'जौन'
यारों
के
यार
थे
हम
तो
Jaun Elia
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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अभी
कल
ही
कोई
बतला
रहा
था
कोई
ग़म
में
मिरे
मुस्का
रहा
था
उन्होंने
आईना
ख़ुद
तोड़
डाला
जो
सच्चाई
उन्हें
समझा
रहा
था
मुहब्बत
उसने
अपनी
बेच
दी
है
मुहब्बत
जो
ख़ुदा
बतला
रहा
था
भला
हो
आप
निकले
बावफ़ा
ही
न
जाने
दिल
में
क्या-क्या
आ
रहा
था
हक़ीक़त
उसकी
ज़ाहिर
हो
गई
जो
वफ़ा
के
नाम
पर
शरमा
रहा
था
अभी
आँखें
खुली
हैं
यार
मेरी
अभी
तक
तो
मैं
धोखा
खा
रहा
था
ज़माने
की
"धरम"
इस
बज़्म
में
भी
कोई
आया
तो
कोई
जा
रहा
था
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Dharamraj deshraj
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किसने
दिया
है
दर्द
हमें
कुछ
पता
नहीं
इतना
पता
है
दर्द
हमारा
है
हिचकियाँ
Dharamraj deshraj
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नज़र
से
दिल
में
दाखिल
हो
रहा
है
कोई
मेरे
मुक़ाबिल
हो
रहा
है
नहीं
अंजाम
की
परवाह
यारो
अभी
इंसान
ग़ाफ़िल
हो
रहा
है
सितम
हँस-हँसके
सहता
हूँ
जहाँ
के
ज़माना
कितना
बेदिल
हो
रहा
है
जमा
कब
तक
करूँँ
ग़म
बाँट
दूँगा
ज़माने
से
जो
हासिल
हो
रहा
है
तिरी
बस्ती
में
सारे
देवता
हैं
यहाँ
जीना
भी
मुश्किल
हो
रहा
है
फ़रेबो
-
फ़न्दस
उन
रहबरों
के
ज़माना
है
कि
कामिल
हो
रहा
है
बुज़ुर्गों
से
'धरम'
हमको
जहाँ
मैं
हुनर
जीने
का
हासिल
हो
रहा
है
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Dharamraj deshraj
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दर्द
होता
है
मुस्कुराने
में
कितना
मजबूर
हूँ
ज़माने
में
लुत्फ़
आता
है
ग़म
उठाने
में
ख़ुश
हूँ
अपने
ग़रीब
खा़ने
में
ज़ख़्म
भरते
ज़ुरूर
हैं
लेकिन
वक़्त
लगता
है
ग़म
भुलाने
में
जब
न
होगा
रक़ीब
तू
जग
में
ज़िक्र
होगा
मिरे
फ़साने
में
एक
दूजे
के
बाँट
लेंगें
ग़म
आ
भी
जाओ
गरीबखाने
में।
घर
बुलाता
हूँ
इसलिए
उनको
कुछ
उजाला
हो
आशियाने
में।
मान
भी
जाइये
कहा
दिल
का
फ़ायदा
क्या
है
क़समसाने
में।
दूसरा
तुम"धरम"
न
पाओगे
ढूंढ़कर
देख
लो
ज़माने
में।
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Dharamraj deshraj
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करके
बुलन्द
हौसला
निकले
जो
घर
से
हम
काँटों
ने
छोड़ा
रास्ता
गुज़रे
जिधर
से
हम
Dharamraj deshraj
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