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Dharamraj deshraj
kisne diya hai dard ha
kisne diya hai dard ha | किसने दिया है दर्द हमें कुछ पता नहीं
- Dharamraj deshraj
किसने
दिया
है
दर्द
हमें
कुछ
पता
नहीं
इतना
पता
है
दर्द
हमारा
है
हिचकियाँ
- Dharamraj deshraj
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कितनी
उजलत
में
मिटा
डाला
गया
आग
में
सब
कुछ
जला
डाला
गया
Manish Shukla
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दुनिया
ने
तजरबात-ओ-हवादिस
की
शक्ल
में
जो
कुछ
मुझे
दिया
है
वो
लौटा
रहा
हूँ
मैं
Sahir Ludhianvi
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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जबसे
आप
गए
हो
मेरे
जीवन
से
गाने
सुनता
हूँ,
पर
गाना
छोड़
दिया
Tanoj Dadhich
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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हम
ही
में
थी
न
कोई
बात
याद
न
तुम
को
आ
सके
तुम
ने
हमें
भुला
दिया
हम
न
तुम्हें
भुला
सके
Hafeez Jalandhari
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वहाँ
शायद
कोई
बैठा
हुआ
है
अभी
खिड़की
में
इक
जलता
दिया
है
Aadil Raza Mansoori
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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दिल
के
ज़ख़्मों
की
निशानी
और
है
ख़ून
सा
आँखों
में
पानी
और
है
जान
देते
थे
फ़क़त
इक
बात
पर
वो
जवानी
ये
जवानी
और
है
कर
लिया
वा'दा
तो
फिर
सोचा
नहीं
बात
मेरी
ख़ानदानी
और
है
फ़ैसले
उसके
सदा
होते
सही
मेरे
रब
की
हुक्मरानी
और
है
भूख,
दौलत
या
के
शौहरत
की
नहीं
शे'र
का
मेरे
मआनी
और
है
प्यार
है
लालो-गुहरस
आपको
हाँ
मगर
मेरी
कहानी
और
है
दिख
रहा
जैसा
नहीं
वैसा
'धरम'
इस
हक़ीक़त
में
कहानी
और
है
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Dharamraj deshraj
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रेत
को
मुट्ठी
में
भर
कर
तय
करें
मीलों
सफ़र
इस
तरह
ख़ुशियाँ
पहुँचती
हैँ
यहाँ
आवाम
तक
Dharamraj deshraj
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जिसको
रब
का
पता
नहीं
मिलता
उसको
ग़म
में
मज़ा
नहीं
मिलता
देवता
तो
बहुत
यहाँ
मिलते
आदमी
का
पता
नहीं
मिलता
अपने
रब
की
तलाश
में
गुम
हैं
वो
हमें
क्यूँँ
भला
नहीं
मिलता
जो
न
पागल
हुए
मुहब्बत
में
सिर्फ़
उसको
ख़ुदा
नहीं
मिलता
मौत
ही
तो
यहाँ
यक़ीनी
है
ज़िन्दगी
का
पता
नहीं
मिलता
लुत्फ़
आता
जिसे
रुलाने
में
बस
वही
ग़मज़दा
नहीं
मिलता
हाल-ए-दिल
जिस
में
'धर्म'
कह
देते
सिर्फ़
वो
क़ाफ़िया
नहीं
मिलता
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Dharamraj deshraj
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दुश्मनों
के
लिए
दु'आ
की
थी
अपने
ग़म
की
यही
दवा
की
थी
ग़म
में
हँसना
ख़ुशी
में
रो
देना
ज़िन्दगी
अपनी
यूँँ
फ़ना
की
थी
जो
सज़ा
मिल
रही
ज़माने
से
हमने
उतनी
नहीं
ख़ता
की
थी
ख़्वाब
ख़ुशियों
के
देखते
रहना
दर्द
की
हमने
यूँँ
दवा
की
थी
दर्द
सीने
में
पाल
कर
हमने
शा'इरी
की
यूँँ
इब्तिदा
की
थी
हमने
मंज़िल
की
जुस्तजू
करके
ज़िन्दगी
अपनी
ख़ुशनुमा
की
थी
सुख
का
एहसास
वो
'धरम'
कैसा
जब
किसी
के
लिए
दु'आ
की
थी
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Dharamraj deshraj
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ग़मज़दा
हूँ
ज़रा
दवा
भेजो
वर्ना
यारब
मुझे
बुला
भेजो
की
दु'आ
माँ
से
उस
जहाँ
से
मुझे
अपने
जैसा
कोई
ख़ुदा
भेजो
ख़त
लिखा
और
इल्तिज़ा
ये
की
दर्द
भेजो
तो
अलहदा
भेजो
फिर
नए
सब्ज़ो-बाग़
ही
लिखकर
मुझको
जीने
का
आसरा
भेजो
सुर्ख़
मौसम
जला
न
दे
यारब
फूल
,
ख़ुश्बू
नई
हवा
भेजो
ख़त
लबों
से
ज़रा-
ज़रा
छूकर
एक
लम्हा
ही
ख़ुशनुमा
भेजो
ऐब
मेरे
'धरम'
नज़र
आएँ
मुझको
ऐसा
इक
आईना
भेजो
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Dharamraj deshraj
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