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Dharamraj deshraj
hamaari zindagi shaayad saza hai
hamaari zindagi shaayad saza hai | हमारी ज़िन्दगी शायद सज़ा है
- Dharamraj deshraj
हमारी
ज़िन्दगी
शायद
सज़ा
है
जिसे
देखो
ग़मों
में
मुब्तिला
है
मेरे
रब
यार
को
मेरे
सुकूँ
दे
मेरे
हिस्से
का
ग़म
उसको
मिला
है
ये
राहे-इश्क़
है
तू
चल
सँभल
कर
फ़क़त
काँटों
भरा
ये
रास्ता
है
लबों
पर
उज्र
लगता
है
दिखावा
ख़ुदा
जाने
कि
उसके
दिल
में
क्या
है
अज़ब
सी
कश्मकश
है
ज़िन्दगी
में
मुझे
या
रब
न
कुछ
भी
सूझता
है
ख़ता
करने
से
पहले
सोच
लेना
ख़ुदा
अच्छा
बुरा
सब
देखता
है
फ़रेबो
फ़न्द
में
हम
सब
लगे
हैं
यहाँ
ईमान
ही
बस
लापता
है
- Dharamraj deshraj
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जुर्म
में
हम
कमी
करें
भी
तो
क्यूँँ
तुम
सज़ा
भी
तो
कम
नहीं
करते
Jaun Elia
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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वो
मेरा
जब
न
हो
सका
तो
फिर
यही
सज़ा
रहे
किसी
को
प्यार
जब
करूँँ
वो
छुप
के
देखता
रहे
Mazhar Imam
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यूँँ
तो
तेरे
सँवरने
पर
कोई
बंदिश
नहीं
है
जाँ
मगर
उस
चाँद
की
तौहीन
करना
ठीक
थोड़ी
है
Harsh saxena
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ज़िंदगी
से
बड़ी
सज़ा
ही
नहीं
और
क्या
जुर्म
है
पता
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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मिरे
गुनाह
की
मुझ
को
सज़ा
नहीं
देता
मिरा
ख़ुदा
कहीं
नाराज़
तो
नहीं
मुझ
से
Shahid Zaki
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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हमीं
तक
रह
गया
क़िस्सा
हमारा
किसी
ने
ख़त
नहीं
खोला
हमारा
मु'आफ़ी
और
इतनी
सी
ख़ता
पर
सज़ा
से
काम
चल
जाता
हमारा
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Shariq Kaifi
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मुसीबत
है
बला
है
और
मैं
हूँ
ग़मों
से
सामना
है
और
मैं
हूँ
परेशाँ
इश्क़
करके
हो
गया
दिल
जहाँ
दुश्मन
हुआ
है
और
मैं
हूँ
मुहब्बत
की
सज़ा
है
क़त्ल
करदो
तुम्हारा
फ़ैसला
है
और
मैं
हूँ
वो
पत्थर
नफ़रतों
के
साथ
लाया
लबों
पर
बद्दुआ
है
और
मैं
हूँ
ज़माना
कितने
ही
तूफ़ाँ
उठाले
मेरे
सँग
में
ख़ुदा
है
और
मैं
हूँ।
मुझे
मालूम
है
मंज़िल
किधर
है
तिरे
घर
का
पता
है
और
मैं
हूँ
ख़रीदेगा
'धरम'
को
वो
भला
क्या
वो
नफ़रत
से
भरा
है
और
मैं
हूँ
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Dharamraj deshraj
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ज़िन्दगी
का
नहीं
था
जब
मक़सद
मौत
का
इंतज़ार
था
मुझको
Dharamraj deshraj
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जाने
किस
-किसको
खा
गई
मिट्टी
ज़ीस्त
क्या
है
बता
गई
मिट्टी
जो
जहाँ
को
बता
चुके
अपना
उनको
अपना
बना
गई
मिट्टी
जिनका
दुनिया
में
नाम
चलता
था
उनको
अपना
बना
गई
मिट्टी
चार
काँधे
पे
जब
गया
कोई
नींद
में
था
जगा
गई
मिट्टी
पास
सब
कुछ
था
अब
नहीं
कुछ
भी
आईना
जब
दिखा
गई
मिट्टी
आम
इंसान
की
विसात
कहाँ
आसमानों
को
खा
गई
मिट्टी
दोस्त
-दुश्मन
सभी
को
ग़म
उसका
जिसको
दूल्हा
बना
गई
मिट्टी
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Dharamraj deshraj
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जाने
किस-किस
को
खा
गई
मिट्टी
ज़ीस्त
क्या
है
बता
गई
मिट्टी
जो
जहाँ
को
बता
चुके
अपना
उनको
अपना
बना
गई
मिट्टी
जिनका
दुनिया
में
नाम
चलता
था
उनको
मिट्टी
बना
गई
मिट्टी
ख़्वाब
कैसे
हसीन
अब
आए
सो
रहा
था
जगा
गई
मिट्टी
पास
सब
है
मगर
नहीं
कुछ
भी
आइना
जब
दिखा
गई
मिट्टी
आम
इंसान
की
बिसात
कहाँ
आसमानों
को
खा
गई
मिट्टी
दोस्त
दुश्मन
नहीं
कोई
उसके
सबकी
हस्ती
मिटा
गई
मिट्टी
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Dharamraj deshraj
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हमने
सलाम
अर्ज़
कहा
अपने
यार
से
वो
राम-राम
कहके
गले
से
लिपट
गया
Dharamraj deshraj
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