chaman men bhi kali ghabra rahi hai | चमन में भी कली घबरा रही है

  - Dharamraj deshraj
चमनमेंभीकलीघबरारहीहै
क़यामतअबयक़ीननरहीहै
कमीहोतीनहींहैदर्द-ओ-ग़ममें
येदौलतरोज़बढ़तीजारहीहै
सिवाख़्वाबोंकेदेखाहीनहींथा
तुम्हारीआँखधोखाखारहीहै
उन्हेंदिलसेगएमुद्द्तहुईहैं
अभीतकउनकीख़ुशबूरहीहै
चलोतक़दीरअपनीख़ुदलिखेंहम
भलेयेज़िन्दगीभटकारहीहै
किसीकीआहनिकलीकहकहोंमें
किसीकोतोग़ज़लयेभारहीहै
जवानीमेंधरमभूलेक़ज़ाको
अभीतोज़िन्दगीइतरारहीहै
  - Dharamraj deshraj
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